वस्तु और सेवा कर-जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार वापस ले लिया है। परिषद ने अभियोजन की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी है। जुर्माने और कारावास की सजा का निर्णय सक्षम अदालत के विवेक पर छोड़ दिया गया है। कर फाइलिंग में देरी, गलती या भुगतान करने में विलंब करने वाले करदाता को वसूली, ब्याज और आनुपातिक जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
नई दिल्ली में आज जीएसटी परिषद की बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा कि दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और दर संरचना तय हो चुकी है। उन्होंने कहा कि परिषद ने नोटिस और कार्यवाही के लिए सामान्य मानकों की सिफारिश की है। वित्त मंत्री ने कहा कि दस हजार रुपये की निर्धारित मौद्रिक सीमा से कम के नोटिस जारी नहीं किए जाएंगे और दस हजार रुपये से कम के लंबित नोटिसों को वापस लिया जाएगा।