*यूआई ग्रीनमेट्रिक रैंकिंग-2026 में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में प्रथम

  • whatsapp
  • Telegram
*यूआई ग्रीनमेट्रिक रैंकिंग-2026 में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में प्रथम
X



*झांसी, 28 सितंबर।* पर्यावरणीय स्थिरता, हरित परिसर और सतत विकास की दिशा में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। *यूआई ग्रीनमेट्रिक वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग-2026* में विश्वविद्यालय ने *भारत में 38वां, उत्तर प्रदेश में प्रथम तथा विश्व स्तर पर 931वां स्थान* प्राप्त किया है। इस उपलब्धि ने पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के बेहतर उपयोग, ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के प्रयासों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिलाई है।

इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में सोमवार को विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर कॉन्फ्रेंस हॉल में *‘सेलिब्रेशन ऑफ अचीवमेंट’* कार्यक्रम का आयोजन आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, विभागों एवं प्रशासनिक इकाइयों के अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर रैंकिंग से संबंधित कार्यों में योगदान देने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय द्वारा हरित एवं सतत विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। परिसर एवं आधारभूत संरचना, ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, परिवहन, शिक्षा एवं अनुसंधान तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की पहलों को सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया।

कुलपति *प्रो. मुकेश पाण्डेय* ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा, “यह सफलता हमारे सामूहिक प्रयासों और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाती है। हमारा लक्ष्य केवल हरित परिसर का निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसा संस्थागत वातावरण विकसित करना है, जहां शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक बनें। विश्वविद्यालय भविष्य में भी सतत विकास और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के क्षेत्र में नए प्रयास करता रहेगा।”

आईक्यूएसी निदेशक *प्रो. सुनील कुमार कबिया* ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित परिसर, सतत परिवहन तथा पर्यावरण केंद्रित शिक्षा एवं अनुसंधान को संस्थागत स्तर पर लगातार मजबूत किया जा रहा है। यह उपलब्धि भविष्य में और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी कार्य करने की प्रेरणा देती है।

कार्यक्रम में उत्कृष्ट योगदान के लिए *डॉ. सुनील के. त्रिवेदी, श्री एम.एम. सिंह, सुश्री अर्चना वर्मा, आर्किटेक्ट सोमा अनिल मिश्रा, सुश्री श्वेता पाण्डेय, श्री एस.के. श्रीवास्तव, श्री प्रकाश चन्द्र, श्री कमलेश बिलगैयां, श्री धीरेन्द्र कुमार शर्मा, श्री आदित्य नारायण, सुश्री नूपुर गौतम, श्री लवकुश द्विवेदी, श्री चेतन आनंद दुबे, सुश्री प्रतिज्ञा पाठक, सुश्री शिल्पा मिश्रा, सुश्री ज्योति कुमारी मिश्रा, श्री विशाल आर्य, श्री हेमंत चन्द्र, श्री सादिक खान, सुश्री हितिका यादव, डॉ. अतुल प्रकाश खरे, श्री अनिल बोहरे, श्री उदय प्रताप सिंह, श्री विनीत कुमार, इंजीनियर साबिर अली, श्री विवेक अग्रवाल, श्री अनुपम व्यास, श्री जाकिर अली, श्री आलोक माहौर, श्री शशि आलोक, श्री पीयूष भारद्वाज, सुश्री काव्या दुबे, श्री ऋषि कुमार सक्सेना, श्री अभिषेक जोशी, श्री आयुष सक्सेना, श्री आनंद कुमार पाण्डेय, श्री संतोष पाण्डेय, श्री राजीव बाबेले, श्री सुनील कुमार सेन, शेख अंजुम, श्री संदीप सिंह, श्री संदीप अग्रवाल, श्री दीपक उपाध्याय, श्री दिनेश कुमार, श्री आशुतोष निगम, श्री शशांक चन्द्र तथा श्री सी.बी. प्रजापति* को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के सामूहिक एवं संस्थागत प्रयासों की सार्थक परिणति बताया। साथ ही पर्यावरणीय नवाचार, संसाधन संरक्षण और हरित पहलों को भविष्य में और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया गया।

विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि उसकी बढ़ती राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान को रेखांकित करने के साथ ही जिम्मेदार, पर्यावरण-संवेदनशील और टिकाऊ उच्च शिक्षा परिसर के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Next Story
Share it