इंडस्ट्री 4.0 और आईओटी (IoT) तकनीक से दक्ष बनेंगे बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के विद्यार्थी

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इंडस्ट्री 4.0 और आईओटी (IoT) तकनीक से दक्ष बनेंगे बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के विद्यार्थी
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झाँसी। आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के उद्देश्य से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित सात दिवसीय 'इंडस्ट्री 4.0 एवं इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)' कार्यशाला का सोमवार को समापन हुआ। 26 अक्टूबर से आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों ने स्मार्ट ऑटोमेशन, कंप्यूटर विजन, क्लाउड कनेक्टिविटी और आधुनिक माइक्रोकंट्रोलर तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

समापन समारोह में प्रो. संध्या अस्थाना ने कहा कि बदलते औद्योगिक परिवेश में विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। ऐसी कार्यशालाएं शिक्षा और उद्योग के बीच कौशल संबंधी अंतर को कम करने के साथ विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता और नवाचार ही भविष्य के इंजीनियरों की सफलता का आधार बनेंगे।

डीन प्रो. एम.एम. सिंह ने कहा कि इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता भी आवश्यक है। आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराता है।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने रास्पबेरी पाई-4, ईएसपी-32 सहित आधुनिक माइक्रोकंट्रोलर पर कार्य करना सीखा। कंप्यूटर विजन तकनीक के माध्यम से हाथों के इशारों से उपकरणों को नियंत्रित करने, सेंसर डेटा को क्लाउड पर भेजने, उसका विश्लेषण करने तथा रियल टाइम डैशबोर्ड विकसित करने का प्रशिक्षण दिया गया। विद्यार्थियों ने आईओटी (IoT)आधारित स्मार्ट सिस्टम और औद्योगिक ऑटोमेशन से जुड़े प्रोजेक्ट भी तैयार किए।

विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला संयोजक डॉ. शशिकांत वर्मा ने कहा कि उद्योगों की बदलती जरूरतों को देखते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अवधि सात दिन से बढ़ाकर 15 दिन की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थी तकनीकों पर अधिक गहनता से कार्य कर सकें।

कार्यशाला के विशेषज्ञ डॉ. आलोक कुमार पांडे ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और सीखने के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि निरंतर अभ्यास और तकनीकी नवाचार के माध्यम से वे उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल इंजीनियर बन सकते हैं।

इस अवसर पर डॉ. जाकिर अली, डॉ. राजेश वर्मा, डॉ. साक्षी दुबे, डॉ. आकांक्षा गुप्ता, डॉ. सुजीत राइकर एवं गौरव वर्मा सहित विभाग के शिक्षक उपस्थित रहे।

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