महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय में 9 अक्टूबर को तीसरा 'बापू-बाजार',

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महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय में 9 अक्टूबर को तीसरा बापू-बाजार,
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आजमगढ़। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में 'बापू-बाजार' का आयोजन आगामी 9 अक्टूबर को विश्वविद्यालय परिसर में किया जाएगा। इस बाजार की शुरुआत वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुंदरलाल शर्मा की प्रेरणा से कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की है |विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस बार बापू-बाजार को मानवीय रूप दिया गया है। बाजार में स्वदेशी, खादी और हस्तनिर्मित उत्पादों के साथ-साथ 'करुणा स्टॉल' भी लगाया जाएगा। इस स्टॉल पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं अपने वस्त्रों का दान करेंगे। एकत्रित वस्त्रों को विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जाएगा।

आयोजन की जिम्मेदारी प्रो. हसीन खान को समन्वयक तथा एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. देवेन्द्र कुमार पाण्डेय को सह-समन्वयक के रूप में सौंपी गई है। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक जरूरतमंदों को चिन्हित करने में जुटे हैं। कुलपति ने कहा कि बापू-बाजार गांधी जी के अंत्योदय के विचार को जीवंत करने का माध्यम है। यह केवल खरीदने-बेचने का बाजार नहीं, बल्कि बांटने, जोड़ने और संवेदना बांटने का मंच है।उन्होंने कहा कि गांधी जी मानते थे कि सच्चा विकास तब है जब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचे।

बापू-बाजार उसी अंत्योदय की प्रयोगशाला है। यहां छात्र स्वदेशी का अर्थ समझते हैं, श्रम का सम्मान सीखते हैं और दान के माध्यम से करुणा का अभ्यास करते हैं, विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के लिए वस्त्रदान की पहल इसी दर्शन का विस्तार है। जब हमारे विद्यार्थी अपने हाथ से जरूरतमंदों तक वस्त्र पहुंचाएंगे, तब उन्हें शिक्षा का वास्तविक अर्थ समझ में आएगा। बाजार का अर्थ केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि समाज में समानता और सम्मान बांटना भी है।

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