लेखक और कवि विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के अहम स्रोत : प्रो. मुकेश पाण्डेय*

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लेखक और कवि विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के अहम स्रोत : प्रो. मुकेश पाण्डेय*
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के मैथिलीशरण गुप्त हिंदी विभाग में हिंदी सप्ताह का समापन समारोह साहित्यिक गरिमा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि लेखक और कवि विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के अहम स्रोत होते हैं। साहित्य विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, रचनात्मकता और विचारशीलता विकसित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ-साथ रचनात्मक एवं साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि झांसी का नाम आते ही वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का स्मरण होता है। भारत ही नहीं, विश्व स्तर पर झांसी वीरता, शौर्य और साहित्यिक परंपरा के लिए अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त और डॉ. वृंदावन लाल वर्मा को भावपूर्वक स्मरण करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने ओरछाधीश रामराजा सरकार और दतिया की मां पीतांबरा को भी नमन किया।

प्रो. पाण्डेय ने कहा कि हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित भाषण, निबंध और काव्य पाठ जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के लिए एक प्रकार की प्रयोगशाला हैं। ऐसी गतिविधियां भविष्य के कवियों, लेखकों और साहित्यकारों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिंदी सप्ताह के विविध कार्यक्रमों से विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन हुआ होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले शैक्षणिक, साहित्यिक एवं रचनात्मक कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया।

उन्होंने हिंदी सप्ताह के सफल आयोजन के लिए हिंदी विभाग और आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने के साथ-साथ साहित्य, भाषा और संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

समारोह के दौरान वृंदावन लाल वर्मा के पौत्र लक्ष्मीकांत वर्मा ने डॉ. वृंदावन लाल वर्मा से जुड़े अनेक प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि डॉ. वर्मा को गढ़कुंडार से विशेष लगाव था। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध झांसी की रानी के व्यक्तित्व और कृतित्व को व्यापक पहचान दिलाने में डॉ. वृंदावन लाल वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया, विशेषकर दक्षिण और शेष भारत में। उन्होंने अपनी चेन्नई यात्रा में झांसी की रानी के बारे में प्रचार प्रसार में डॉ वृंदावन लाल वर्मा के झांसी की रानी उपन्यास की चर्चा की।

कार्यक्रम के दौरान हिंदी सप्ताह के अंतर्गत आयोजित विविध प्रतियोगिताओं के विजेताओं को कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। भाषण प्रतियोगिता में शोध छात्रा दिव्या निगम ने प्रथम, अमित अहिरवार ने द्वितीय और नमन चतुर्वेदी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निबंध लेखन प्रतियोगिता में अंकित तिवारी प्रथम, गीता देवी द्वितीय तथा वंदना पाल तृतीय रहीं। वहीं काव्य पाठ प्रतियोगिता में सुन्दरम चतुर्वेदी ने प्रथम, अभिषेक बबेले ने द्वितीय और पलक गुप्ता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। .

हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित काव्य पाठ, निबंध लेखन एवं भाषण प्रतियोगिताओं में 40 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। काव्य पाठ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी मौलिक रचनाओं और प्रभावी प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल में श्रीमती रमा शुक्ला, श्रीमती रंजना सिंह बुन्देला, श्री भगवान सिंह कुशवाहा और श्री अरुण कुमार हिंगवासिया शामिल रहे।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय एवं अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर एवं पुष्प अर्पित कर किया। कला संकायाध्यक्ष एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. पुनीत बिसारिया ने कुलपति एवं सभी अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में प्रो. मुन्ना तिवारी, डॉ. अचला पाण्डेय, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ. प्रेमलता, डॉ. भगवान दास राही, डॉ. बिपिन प्रसाद, डॉ. सुनीता वर्मा, श्रीमती रमा शुक्ल, डॉ० द्युति मालिनी, डॉ. राघवेन्द्र दीक्षित, अरुण कुमार हिंगवासिया, उमेश शुक्ल, अतीत विजय, रवीन्द्र गुप्त, संतोष दीक्षित, मनीष मण्डल, पर्वत, प्रदीप, सौरभ, गिरिजा शंकर, आकांक्षा, प्रिंस, रितु, आकाश यादव, अम्बर दीक्षित, गौरव पटैरिया,अरविन्द सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, साहित्यकार और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुधा दीक्षित ने किया। अंत में कला संकायाध्यक्ष एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. पुनीत बिसारिया ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, निर्णायकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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