फॉरेंसिक विज्ञान न्याय व्यवस्था की रीढ़, विद्यार्थियों को मिलेगा वास्तविक अपराध स्थलों का व्यावहारिक अनुभव

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फॉरेंसिक विज्ञान न्याय व्यवस्था की रीढ़, विद्यार्थियों को मिलेगा वास्तविक अपराध स्थलों का व्यावहारिक अनुभव
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस वीक ‘ज्ञानप्रभा 2.0’ का शनिवार को गरिमामय वातावरण में समापन हुआ। सप्ताहभर चले आयोजन में विद्यार्थियों ने शैक्षणिक, वैज्ञानिक, खेल एवं रचनात्मक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विकास कुमार, आईपीएस ने कहा कि अपराध अनुसंधान एवं न्याय प्रक्रिया में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को वास्तविक अपराध घटनास्थलों के निरीक्षण एवं व्यावहारिक अनुभव का अवसर उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हुए कहा कि इससे विद्यार्थी फॉरेंसिक कार्यप्रणाली और वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी ढंग से समझ सकेंगे।

विशिष्ट अतिथि एवं राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, जयपुर, राजस्थान के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस देश की न्याय व्यवस्था की रीढ़ है। वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से अपराधों की निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सप्ताहभर की गतिविधियों के आयोजन एवं प्रबंधन में विद्यार्थियों के अनुशासन, उत्साह और समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व, टीमवर्क और संगठनात्मक क्षमता का विकास करते हैं।

कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्थान के समन्वयक डॉ. विजय कुमार यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए ‘ज्ञानप्रभा 2.0’ के अंतर्गत आयोजित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक पक्षों से भी परिचित कराया गया।

कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों एवं आयोजन टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। डीन, विज्ञान संकाय प्रो. आलोक वर्मा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के साथ उन्हें अपने विषय के व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. मुरली मनोहर यादव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

समारोह में आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सुनील काबिया, प्रो. एम.एम. सिंह, डॉ. प्रकाश चंद्र सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में विभागीय शिक्षक डॉ. आकाश कुमार एवं चंदन नामदेव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अमन कुमार सिंह एवं शांतनु सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अंकिता सिकोरिया ने किया।

‘ज्ञानप्रभा 2.0’ के माध्यम से विद्यार्थियों की वैज्ञानिक दृष्टि, रचनात्मकता, व्यावहारिक कौशल और टीम भावना को प्रोत्साहन मिला। साथ ही फॉरेंसिक विज्ञान को अपराध अनुसंधान, समाज और न्याय व्यवस्था से जोड़ने की उपयोगिता को भी प्रभावी ढंग से रेखांकित किया गया।

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