बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में एएनआरएफ-पेयर सक्षम परियोजना की समीक्षा बैठक सम्पन्न
*झाँसी, 28 सितम्बर।* बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में एएनआरएफ-पेयर सक्षम (ANRF-PAIR SAKSHAM) परियोजना के अंतर्गत संचालित सात शोध परियोजनाओं की प्रगति की...

*झाँसी, 28 सितम्बर।* बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में एएनआरएफ-पेयर सक्षम (ANRF-PAIR SAKSHAM) परियोजना के अंतर्गत संचालित सात शोध परियोजनाओं की प्रगति की...
*झाँसी, 28 सितम्बर।* बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में एएनआरएफ-पेयर सक्षम (ANRF-PAIR SAKSHAM) परियोजना के अंतर्गत संचालित सात शोध परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा सोमवार को विश्वविद्यालय के कुलपति समिति कक्ष में की गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस दौरान उन्नत सामग्री, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरणीय स्थिरता एवं ऊर्जा से संबंधित शोध कार्यों की वैज्ञानिक उपलब्धियों, प्रयोगात्मक प्रगति और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
परियोजना के हब संस्थान आईआईटी इंदौर से उन्नत सामग्री विषय के समन्वयक प्रो. शैलेश आई. कुंडलवाल, पर्यावरणीय स्थिरता एवं ऊर्जा विषय के समन्वयक प्रो. देबायन सरकार तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी विषय के समन्वयक प्रो. हेम चंद्र झा ने बैठक में भाग लिया। विशेषज्ञों ने संबंधित परियोजनाओं के शोध कार्यों का अवलोकन करते हुए शोधकर्ताओं से प्रयोगात्मक परिणामों और भावी अनुसंधान योजनाओं पर संवाद किया।
कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि एएनआरएफ-पेयर सक्षम परियोजना बुन्देलखण्ड क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शोध को केवल उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशनों तक सीमित न रखकर पेटेंट, नवाचार, तकनीकी हस्तांतरण और समाजोपयोगी तकनीकों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य शोध को प्रयोगशाला तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना होना चाहिए। एएनआरएफ-पेयर सक्षम के माध्यम से बुन्देलखण्ड की स्थानीय चुनौतियों के वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है।”
कुलपति ने कहा कि हब और स्पोक संस्थानों के बीच नियमित वैज्ञानिक संवाद, शोधार्थियों के आदान-प्रदान और विशेषज्ञता के साझा उपयोग से शोध की गुणवत्ता तथा उसके परिणामों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
एएनआरएफ-पेयर सक्षम के स्पोक समन्वयक डॉ. लवकुश द्विवेदी ने परियोजना की समग्र प्रगति प्रस्तुत की। उन्होंने सातों शोध परियोजनाओं की उपलब्धियों, शोध गतिविधियों, मानव संसाधन, वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग, शोध परिणामों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत सात कनिष्ठ शोध अध्येता विभिन्न विषयगत क्षेत्रों में अनुसंधान कर रहे हैं। इसके साथ ही परियोजना से विश्वविद्यालय में अंतरविषयी अनुसंधान और उन्नत वैज्ञानिक सुविधाओं के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहन मिला है।
आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय में परियोजना की प्रगति, शोधकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी और संस्थागत सहयोग की सराहना की। प्रो. शैलेश आई. कुंडलवाल ने उन्नत सामग्री के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं वैज्ञानिक सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
प्रो. देबायन सरकार ने पर्यावरणीय स्थिरता एवं ऊर्जा से जुड़े शोध कार्यों को बुन्देलखण्ड की स्थानीय पर्यावरणीय और ऊर्जा संबंधी चुनौतियों से जोड़ने पर बल दिया। वहीं प्रो. हेम चंद्र झा ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरविषयी शोध की सराहना करते हुए शोध परिणामों को व्यावहारिक और समाजोपयोगी समाधान में बदलने पर जोर दिया।
बैठक में सातों परियोजनाओं से जुड़े शोधकर्ताओं ने अपनी प्रगति प्रस्तुत की। विशेषज्ञों ने प्रयोगात्मक परिणामों, शोध प्रकाशन, पेटेंट, तकनीकी विकास और संभावित तकनीकी हस्तांतरण के संबंध में सुझाव दिए। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय और आईआईटी इंदौर के बीच संयुक्त शोध, शिक्षक एवं शोधार्थी आदान-प्रदान, विशेषज्ञ व्याख्यान तथा भविष्य में संयुक्त परियोजना प्रस्ताव तैयार करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
इस अवसर पर प्रो. विनीत कुमार, डॉ. संजीव श्रीवास्तव, डॉ. अनुपम व्यास, डॉ. स्मृति त्रिपाठी, डॉ. डी.एम. त्रिपाठी, डॉ. शशि आलोक, डॉ. प्रकाश चंद्र, डॉ. विजय कुमार, डॉ. जाकिर अली एवं डॉ. अवनीश दुबे सहित संबंधित परियोजनाओं के शोधकर्ता एवं कनिष्ठ शोध अध्येता उपस्थित रहे।
समीक्षा बैठक में शोध को प्रकाशन से आगे बढ़ाकर पेटेंट, तकनीकी विकास, संयुक्त अनुसंधान और समाजोपयोगी नवाचारों तक ले जाने की दिशा में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय और आईआईटी इंदौर के बीच वैज्ञानिक सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सहमति बनी।





