कौशल विकास से विकसित भारत का सपना होगा साकार : मुनीश जी

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘मेरे सपनों का भारत-विकसित भारत की संकल्पना 2047’ विषयक भाषण प्रतियोगिता में विभिन्न महाविद्यालयों के 106 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग कर विकसित भारत के अपने विचार और सपने प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कानपुर प्रांत प्रचारक श्री मुनीश जी ने प्रतिभागी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि आज के युवाओं को शिक्षा के साथ कम से कम एक कौशल अवश्य सीखना चाहिए। कौशल विकास के माध्यम से ही युवा आत्मनिर्भर बनेंगे और देश विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में किसी न किसी कला का विकास होना चाहिए, क्योंकि कला ज्ञान और भावनाओं की प्रभावी अभिव्यक्ति का माध्यम है। युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मन पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। जिसने अपने मन को साध लिया, वह जीवन में निरंतर आगे बढ़ सकता है।

भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ भारतीय जीवन दृष्टि का मूल भाव रहा है। हमारे पूर्वजों ने केवल अपने समाज या देश के बारे में नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की परंपरा विकसित की।

विशिष्ट अतिथि प्राचार्य राकेश पांडेय ने जेन-जी युवाओं से अपने कौशल को निरंतर निखारने का आह्वान किया। उन्होंने ललित कला के विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय युवा अपनी प्रतिभा और कौशल से विश्व स्तर पर प्रभाव छोड़ रहे हैं। विद्यार्थियों को रचनात्मकता के साथ कौशल विकास को भी अपने व्यक्तित्व का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।

अतिथि साहित्यकार रचना विमल ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत की संकल्पना से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, सामाजिक दायित्व और सोशल मीडिया संस्कृति जैसी अनेक चुनौतियों के बीच युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारतीय ज्ञान परंपरा और अपने सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाकर युवा इन चुनौतियों का समाधान खोज सकते हैं।

इससे पूर्व बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों में भाग लेने वाला प्रत्येक विद्यार्थी और शिक्षक बधाई का पात्र है। उन्होंने विद्यार्थियों की सृजनात्मकता की प्रशंसा करते हुए कहा कि रंगोली, कला और भाषण जैसी गतिविधियां जागरूकता उत्पन्न करने के साथ विकसित भारत के सपने को अभिव्यक्ति प्रदान करती हैं।

भाषण प्रतियोगिता में रघुवीर सिंह महाविद्यालय की संस्कृति भोंडले ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। दयानंद वैदिक कॉलेज की प्राची सिंह द्वितीय तथा नेहरू महाविद्यालय, ललितपुर की समृद्धि पाराशर तृतीय स्थान पर रहीं। प्रतियोगिता के निर्णायक साहित्यकार पन्नालाल असर एवं ब्रजलता मिश्रा रहे।

कार्यक्रम का निर्देशन एवं मंच संचालन सेवा संकल्प अभियान के नोडल अधिकारी प्रो. मुन्ना तिवारी ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, निर्णायकों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया एवं सम्मानित किया । इस अवसर पर प्रो. राज भारद्वाज सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकडॉ अचला पाण्डेय, डॉ श्वेता पांडेय,दो राघवेन्द्र दीक्षित, अतीत विजय, डॉ प्रशांत मिश्रा, डॉ संतोष पाण्डेय, डॉ श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ विपिन प्रसाद, डॉ आशीष दीक्षित, राघवेंद्र द्विवेदी, डॉ रिचा सेंगर, डॉ गरिमा ,जोगेन्द्र कुमार ,आशुतोष शर्मा उपस्थित रहे एवं विभिन्न महाविद्यालयों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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