गांधी जी के श्रमदान और शास्त्री जी की सादगी को जीवन में उतारें युवा : कुलपति

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गांधी जी के श्रमदान और शास्त्री जी की सादगी को जीवन में उतारें युवा : कुलपति
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आजमगढ़। महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन-मूल्यों को आत्मसात कर युवा पीढ़ी समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकती है। गांधीजी ने श्रमदान, स्वच्छता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया, वहीं शास्त्रीजी का सादगीपूर्ण जीवन कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। यह विचार महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए।

कुलपति ने दोनों महापुरुषों की जीवनी और उनके संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी को उनके जीवन के प्रेरक प्रसंगों को व्यवहार में उतारना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से श्रमदान की भावना को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने जन्मस्थान के साथ-साथ कार्यस्थल पर भी श्रमदान करने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ स्वच्छता अभियान में स्वयं श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया।

कुलपति ने छुआछूत और सामाजिक भेदभाव जैसी कुरीतियों से दूर रहकर समानता एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ परिसर के साथ स्वच्छ विचार और स्वस्थ सामाजिक वातावरण का निर्माण भी हमारी जिम्मेदारी है।

*कुलसचिव*अमृत लाल जी ने दोनों महापुरुषों को नमन करते हुए कहा कि दो अक्टूबर केवल जयंती मनाने का दिन नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन और कार्यशैली में उतारने का अवसर है।

कार्यक्रम के दौरान नशामुक्त युवा भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को कुलपति ने प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान की छात्रा प्रतिष्ठा चतुर्वेदी ने किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. देवेंद्र कुमार पाण्डेय, डॉ. शशि प्रकाश शुक्ला, डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. हरेंद्र सिंह प्रजापति, डॉ. परमानंद पाण्डेय, डॉ.सचिन राय, डॉ. भंवर लाल सहित अन्य अतिथि प्रवक्ता, विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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