साहित्यिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं: प्रो. सौबान सईद

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साहित्यिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं: प्रो. सौबान सईद
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लखनऊ, 03 अक्टूबर 2026: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस के की मुनासबत से कला संकाय के विद्यार्थियों द्वारा अबुल कलाम आज़ाद अकादमिक भवन स्थित अटल हॉल में मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कला एवं मानविकी संकाय के संकायाध्यक्ष तथा उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. सौबान सईद ने की।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. थुबान सईद ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने अपनी क्षमता से बढ़कर इस मुशायरे और कवि सम्मेलन की महफ़िल सजाई है तथा एक अत्यंत सुंदर और यादगार साहित्यिक वातावरण का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि मुशायरा केवल कविता सुनने और सुनाने की महफ़िल नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक, सामाजिक और साहित्यिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतिबिंब है। मुशायरे की परंपरा ने उर्दू भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ समाज में आपसी मेल-जोल, सहिष्णुता, शिष्टाचार और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आगे कहा कि मुशायरे की महफ़िल में विभिन्न विचार, भावनाएँ और अनुभव एक-दूसरे से संवाद करते हैं, जिससे विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति का कौशल, आत्मविश्वास और साहित्यिक रुचि विकसित होती है। आज के दौर में जब नई पीढ़ी का अपनी भाषा और संस्कृति से संबंध कुछ हद तक कमजोर होता जा रहा है, ऐसी साहित्यिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लें, क्योंकि ऐसी गतिविधियाँ व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मुशायरे एवं कवि सम्मेलन में विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं ने अपनी ग़ज़लें और कविताएँ प्रस्तुत कर अपनी काव्य प्रतिभा, रचनात्मक क्षमता और साहित्यिक योग्यता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का सबसे सुंदर और यादगार क्षण उस समय आया, जब प्रसिद्ध कवियों डॉ. कुमार विकास, डॉ. सुधा मिश्रा और डॉ. प्रशिशा श्रीवास्तव ने अपनी ग़ज़लों एवं कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी भावपूर्ण रचनाओं ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। इन कवियों की सहभागिता ने विद्यार्थियों की इस साहित्यिक पहल को विशेष प्रतिष्ठा प्रदान की तथा पूरे वातावरण को काव्य-सौंदर्य, सांस्कृतिक रंग और साहित्यिक सुगंध से भर दिया। डॉ. नीरज शुक्ला ने भी अपने विचार व्यक्त किए और विभिन्न कवियों की रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया ।

कार्यक्रम के समापन से पूर्व डॉ. सरवत तकी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में मुशायरे तो बहुत आयोजित हो रहे हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण मुशायरे अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने जिस सलीके, रुचि और समर्पण के साथ इस सुंदर साहित्यिक महफ़िल का आयोजन किया है, वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय है और इसे भी गुणवत्तापूर्ण मुशायरों की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सभी ने अत्यंत कुशलता के साथ इस साहित्यिक आयोजन को व्यवस्थित किया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ऐसी गतिविधियाँ न केवल विद्यार्थियों की साहित्यिक रुचि को विकसित करती हैं, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक एवं सामाजिक परंपराओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यक्रम का संचालन रिसर्च स्कॉलर हसन अकबर तथा मुहम्मद अनस ने किया, जबकि अंत में रिसर्च स्कॉलर राशिदा खातून ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मुशायरे एवं कवि सम्मेलन के संयोजक डॉ. हारून रशीद थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में नासिरा खातून, गुलाम वारिस, अलाउद्दीन तथा उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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