महात्मा गांधी से दीनदयाल उपाध्याय तक भारत की यात्रा अंत्योदय की यात्रा : प्रो. सुरेंद्र दुबे

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महात्मा गांधी से दीनदयाल उपाध्याय तक भारत की यात्रा अंत्योदय की यात्रा : प्रो. सुरेंद्र दुबे
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झाँसी। महात्मा गांधी से पंडित दीनदयाल उपाध्याय तक भारतीय चिंतन की मूल धारा समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण और अंत्योदय की रही है। गांधी के सत्य एवं अहिंसा तथा दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के विचार में मानवीय संवेदना और समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता समान रूप से दिखाई देती है। यह बात बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कही।

वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ एवं इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड अप्लाइड सोशल साइंसेज के संयुक्त तत्वावधान में गांधी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। व्याख्यान का विषय “महात्मा गांधी से दीनदयाल उपाध्याय तक भारत : अंतिम आदमी से अंत्योदय तक की यात्रा” रहा।

प्रो. दुबे ने कहा कि भारत को केवल एक भूखंड के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति, चेतना और मानवीय मूल्यों की जीवंत परंपरा के रूप में समझना चाहिए। युवाओं को भारतीय इतिहास, भाषाओं, साहित्य, संस्कृति और कलाओं के प्रति गहरी समझ विकसित करनी होगी।

वर्तमान तकनीकी दौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और सूचना प्रौद्योगिकी ने सूचनाओं की उपलब्धता को व्यापक बनाया है, लेकिन केवल सूचना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि सूचना को ज्ञान और ज्ञान को विवेक में परिवर्तित किया जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदना, नैतिकता और सांस्कृतिक चेतना का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

कार्यक्रम का स्वागत एवं संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक प्रो. मुन्ना तिवारी ने किया। उन्होंने प्रो. दुबे के अकादमिक एवं साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका एक नाटक बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी शामिल है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अचला पाण्डेय ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. डी.के. भट्ट, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ. नवीन चंद्र पटेल, डॉ. श्वेता पाण्डेय, डॉ. प्रेमलता, डॉ. सुनीता, डॉ. सुधा, डॉ. आशीष दीक्षित, डॉ. दिलीप, डॉ. अजय गुप्ता, डॉ. रिचा, डॉ. गरिमा, डॉ. कपिल, डॉ. राघवेंद्र, डॉ. आशुतोष सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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