विश्व हैबिटेट दिवस पर भाषा विश्वविद्यालय में हुआ पर्यावरणीय चुनौतियों पर मंथन, सतत विकास पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

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विश्व हैबिटेट दिवस पर भाषा विश्वविद्यालय में हुआ पर्यावरणीय चुनौतियों पर मंथन, सतत विकास पर विशेषज्ञों ने दिया जोर
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ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में विश्व हैबिटेट दिवस के अवसर पर मंगलवार को “हैबिटेट अल्टरेशन एंड एनवायरनमेंटल डीग्रेडेशन” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज की पर्यावरण विज्ञान इकाई द्वारा आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. ओंकार उपाध्याय तथा विशिष्ट अतिथि सीएसआईआर-सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ की पैरासाइटोलॉजी डिवीजन की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शैलजा भट्टाचार्य रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का शॉल, स्मृति चिह्न एवं पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। पर्यावरण संरक्षण के संदेश को ध्यान में रखते हुए पौधा भेंट करने की पहल ने कार्यक्रम को विशेष अर्थ प्रदान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंजीनीयरिंग विभाग के निदेशक डॉ. आर.के. त्रिपाठी ने कहा कि मानव बस्तियों और अन्य जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए मानव विकास और प्रकृति के बीच संतुलन आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि डॉ. शैलजा भट्टाचार्य ने परजीवी संक्रमणों पर अपने 38 वर्षों के शोध अनुभव साझा करते हुए पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और जीव-जगत के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को भी रेखांकित किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने संगोष्ठी के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरणीय क्षरण और आवास परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने स्मार्ट सिटी की अवधारणा पर विचार करते हुए कहा कि शहरों को केवल तकनीकी रूप से स्मार्ट बनाने के बजाय हरित क्षेत्रों के संरक्षण, संवर्धन और विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरों के सतत विकास के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्याप्त ग्रीन स्पेस सुनिश्चित करना आवश्यक है। मुख्य अतिथि प्रो. ओंकार उपाध्याय ने पर्यावरणीय विष विज्ञान और कीट प्रबंधन के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।

संगोष्ठी के संयोजक डॉ. बी.के. द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, कुलपति, विश्वविद्यालय प्रशासन, प्रतिभागियों एवं आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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