इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स में तीन दिवसीय ‘चित्राक्षी समूह कला प्रदर्शनी’ एवं मूर्तिकला कार्यशाला का समापन
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक जी के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स में आयोजित...
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक जी के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स में आयोजित...
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक जी के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स में आयोजित तीन दिवसीय ‘चित्राक्षी समूह कला प्रदर्शनी 2026–27’ एवं ‘स्कल्पचर वर्कशॉप एंड डेमोंस्ट्रेशन’ (मूर्तिकला कार्यशाला एवं प्रदर्शन) का समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध मूर्तिकार एवं लखनऊ तथा पटना विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर प्रो. कृष्ण चंद्र वाजपेयी तथा इनोवेशन सेल की डीन प्रो. शिल्पा कायस्थ विशिष्ट रूप से उपस्थित रहीं।
मूर्तिकला कार्यशाला में प्रो. कृष्ण चंद्र वाजपेयी ने विद्यार्थियों को मूर्तिकला की विभिन्न तकनीकों, रचनात्मक प्रक्रियाओं और कलात्मक अभिव्यक्ति के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया। उन्होंने विद्यार्थियों की सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करते हुए मूर्तिकला में मौलिक सोच, तकनीकी दक्षता और निरंतर अभ्यास के महत्त्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रो. शिल्पा कायस्थ, डीन, इनोवेशन सेल ने विद्यार्थियों की कलाकृतियों की सराहना की और उनके रचनात्मक प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि कला विद्यार्थियों में नवाचार, कल्पनाशीलता और स्वतंत्र चिंतन विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा नई संभावनाओं की खोज करने के लिए प्रेरित करते हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने कहा कि कला प्रदर्शनियाँ और कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को अनुभवी कलाकारों के सान्निध्य में सीखने, अपने व्यावहारिक ज्ञान को समृद्ध करने तथा अपनी कलात्मक प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान करती हैं। संस्थान विद्यार्थियों को कला की समृद्ध भारतीय परंपरा से जोड़ने के साथ-साथ समकालीन कलात्मक दृष्टि विकसित करने के लिए निरतर प्रयासरत है।
प्रदर्शनी के संयोजक एवं क्यूरेटर डॉ. मंतोष यादव ने बताया कि ‘चित्राक्षी समूह कला प्रदर्शनी’ का उद्देश्य भारतीय पारंपरिक एवं लोककलाओं को आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ते हुए विद्यार्थियों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना है। प्रदर्शनी में बीएफए तृतीय वर्ष के लगभग 40 विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई 50 म्यूरल पेंटिंग प्रदर्शित की गईं। समापन समारोह में इन कलाकृतियों पर आधारित कैटलॉग का विमोचन किया गया। साथ ही, प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर उनके परिश्रम, रचनात्मकता और कलात्मक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस पहल से विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ा और उन्हें भविष्य में बेहतर कलात्मक कार्य करने की प्रेरणा मिली।
मूर्तिकला कार्यशाला का संयोजन जे.बी. यादव तथा सह-संयोजन डॉ. विजय कुमार त्रिपाठी ने किया।
इस अवसर पर प्रो. शुभम शिवा, डॉ. राज कुमार सिंह, तनीषा वधावन, विनय सिंह, प्रिया मिश्रा, कीर्ति वर्मा सहित संस्थान के शिक्षकगण, आयोजन समिति के सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।





