भाषा विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल व्हाइट कैन सेफ्टी डे मनाया गया, समावेशी समाज का दिया संदेश

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भाषा विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल व्हाइट कैन सेफ्टी डे मनाया गया, समावेशी समाज का दिया संदेश
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ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के सक्षम प्रकोष्ठ एवं नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड, उत्तर प्रदेश राज्य शाखा, इंदिरा नगर, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में इंटरनेशनल व्हाइट कैन सेफ्टी डे मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दृष्टिबाधित व्यक्तियों के अधिकारों, सम्मान, स्वतंत्र आवागमन और सामाजिक समावेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों में अपार प्रतिभा और क्षमता होती है। उन्हें आगे बढ़ने के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्वेत छड़ी केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से समावेशी एवं सुगम वातावरण के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड की उत्तर प्रदेश राज्य शाखा की उपाध्यक्ष सुश्री अमिता दुबे ने श्वेत छड़ी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए दृष्टिबाधित व्यक्तियों के प्रति जागरूकता, समानता और सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को समझने और उनके लिए सुगम वातावरण बनाने में सहयोग करने की अपील की।

विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रशासन विभाग के अध्यक्ष एवं सक्षम प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी प्रो. मुशीर अहमद ने कहा कि दृष्टिबाधिता किसी व्यक्ति की प्रतिभा, बुद्धिमत्ता या नेतृत्व क्षमता की सीमा निर्धारित नहीं करती। उन्होंने सामाजिक पूर्वाग्रहों और असुगम्य बुनियादी ढांचे को दूर कर दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कुलसचिव एवं परीक्षा नियंत्रक श्री विकास ने समावेशी शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में संस्थागत सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने दिव्यांग विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षाओं में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा उनकी सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय एवं नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जागरूकता आधारित लघु नाटिकाओं के माध्यम से दृष्टिबाधित व्यक्तियों की चुनौतियों, उपलब्धियों और आकांक्षाओं को प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने समानता, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा का संदेश दिया।

कार्यक्रम में डॉ. सुषमा, डॉ. सौरभ सोनकर, विश्वविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी तथा नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के सदस्य उपस्थित रहे। आयोजन के माध्यम से दृष्टिबाधित व्यक्तियों के अधिकारों, सुरक्षित आवागमन और समावेशी समाज के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

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