सीएसजेएमयू में सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गायन से गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के सेनानायक तात्या टोपे सभागार हॉल में मा.कुलपति की प्रेरणा से हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला के...
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के सेनानायक तात्या टोपे सभागार हॉल में मा.कुलपति की प्रेरणा से हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला के...
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के सेनानायक तात्या टोपे सभागार हॉल में मा.कुलपति की प्रेरणा से हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला के तत्वावधान में सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गायन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और भारतीय परंपराओं के प्रति श्रद्धा का भाव देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने सामूहिक गायन के माध्यम से राष्ट्र के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना व्यक्त की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पालीवाल डायग्नोस्टिक सेंटर के अध्यक्ष श्री उमेश पालीवाल ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आगामी 26 से 30 नवंबर तक वीरेंद्र स्वरूप पार्क में आयोजित होने वाले हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और जीवन-मूल्यों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों, संस्कारों और परंपराओं से जुड़ा रहता है, तब वह सामाजिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सकता है। उन्होंने लोगों से सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक श्री भवानी भीख ने ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली इतिहास और उसके शाब्दिक अर्थ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेरणा और राष्ट्रभक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों में देश के प्रति समर्पण और राष्ट्रीय चेतना की भावना को प्रबल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि समाज को केवल सफल व्यक्तियों से ही प्रेरणा नहीं लेनी चाहिए, बल्कि ऐसे लोगों के जीवन से भी सीखना चाहिए, जिन्होंने अपना समय, प्रतिभा और सामर्थ्य समाज तथा राष्ट्र के कल्याण के लिए समर्पित किया। किसी व्यक्ति के जीवन की सार्थकता उसके समाज के प्रति योगदान से भी निर्धारित होती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और ऊर्जा का उपयोग समाजोपयोगी कार्यों में करें। ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिनसे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिले और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो।
सेवा और संस्कारों से मजबूत होगा समाज
कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा, राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध और सामाजिक सेवा के महत्व पर विचार व्यक्त किए। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करना रहा। सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गायन ने उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. हारेंद्र मुर्झानी उपस्थित रहे। दीनदयाल शोध केंद्र के निदेशक प्रो. दिग्विजय शर्मा, समन्वयक डॉ. हरीश शर्मा तथा डॉ. एसके द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय के अनेक छात्र-छात्राएं और गणमान्य नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए।





