भूविज्ञान में शोध की अपार संभावनाएं, आधुनिक तकनीकों से मिलेगी नई दिशा : प्रो. सुनील काबिया

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भूविज्ञान में शोध की अपार संभावनाएं, आधुनिक तकनीकों से मिलेगी नई दिशा : प्रो. सुनील काबिया
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झाँसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के 27वें स्थापना माह का सोमवार को शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर ‘टुवर्ड्स द नेक्स्ट सेंचुरी ऑफ जियोलॉजिकल एक्सीलेंस’ थीम का विमोचन किया गया। कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने विभाग की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मुख्य अतिथि आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सुनील काबिया ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में भूवैज्ञानिक अनुसंधान की अपार संभावनाएं हैं। विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आलोक कुमार वर्मा ने बुंदेलखंड क्रैटॉन को प्राचीन भूवैज्ञानिक संरचनाओं और खनिज संसाधनों के अध्ययन की महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रयोगशाला बताया।

पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. एम.एम. सिंह ने विभाग की 27 वर्षों की विकास यात्रा साझा करते हुए बताया कि इसी माह अत्याधुनिक जीआईएस एवं रिमोट सेंसिंग प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी, जिससे शोध एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

विभागाध्यक्ष प्रो. वी.के. सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। डॉ. चेतन आनंद दुबे ने समारोह की थीम का महत्व बताते हुए कहा कि आधुनिक भूविज्ञान जलवायु परिवर्तन, भूजल प्रबंधन और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस अवसर पर प्रो. अवनीश कुमार, खेल अधिकारी सूरजपाल सिंह सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। डॉ. प्रतिज्ञा पाठक ने आभार व्यक्त किया।

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