बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में छह दिवसीय ‘प्रेरणा कैफे’ कार्यशाला संपन्न, महिलाओं को मिले प्रमाणपत्र
झाँसी। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और व्यावहारिक प्रशिक्षण आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को स्वरोजगार एवं...
झाँसी। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और व्यावहारिक प्रशिक्षण आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को स्वरोजगार एवं...
झाँसी। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और व्यावहारिक प्रशिक्षण आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़कर उनके आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह विचार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने सोमवार को इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट (आईटीएचएम) में आयोजित छह दिवसीय ‘प्रेरणा कैफे’ कार्यशाला के समापन समारोह में व्यक्त किए।
कुलपति ने कहा कि महिलाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है। पूर्व कुलपति प्रो. डी.के. शर्मा ने कार्यशाला को महिला सशक्तिकरण की सार्थक पहल बताया। आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सुनील कुमार कबिया ने कौशल आधारित शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। डीसी एनआरएलएम सुनील कुमार एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट आईएएस आयुष सैनी ने महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में संस्थागत सहयोग की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला समन्वयक डॉ. नूपुर गौतम ने बताया कि 27 अक्टूबर से आयोजित प्रशिक्षण में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को खाद्य सेवा, आतिथ्य प्रबंधन, कैफे संचालन एवं उद्यमिता का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। अंतिम दिन रसोई उपकरणों के संचालन की जानकारी भी दी गई।
प्रतिभागी बीना वत्स एवं गायत्री सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशिक्षण को उपयोगी बताया। समारोह में प्रतिभागियों एवं प्रशिक्षकों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आस्था सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ. ममता सिंह, डॉ. प्रतिभा आर्या, डॉ. निष्ठा व्यास, डॉ. ज्योति मिश्रा, डॉ. आयुष सक्सेना, शेफ अभिषेक जोशी सहित शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।





