लॉकडाउन समाप्त होने के बाद लौटने वाले मजदूरों के लिए भी रोजगार उपलब्ध कराएगी सरकार

रांची. मंत्रिमंडलीय उपसमिति के सीनियर मेंबर डॉक्टर रामेश्वर उरांव ने कहा कि जिन लोगों के पास राशन कार्ड नहीं है और इसके लिए आवदेन भी नहीं दिया है वैसे लोगों को भी राशन दिया जाएगा। इसके लिए उन्हे मुखिया या अपने स्थानीय प्रतिनिधि को आवेदन देना होगा। जिनके पास राशन कार्ड है उन्हें तीन माह का अनाज दिया जा रहा है जबकि जिन्होंने राशन कार्ड का आवेदन दिया है उन्हें भी दस किलोग्राम प्रतिमाह के हिसाब से राशन दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि झारखंड के विभिन्न जिलों में फंसे दूसरे राज्य के मजदूरों को भी राहत दी जाएगी। उन्हें भूखा नहीं रहने दिया जाएगा। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद लौटने वाले मजदूरों के लिए भी रोजगार उपलब्ध कराने के लिए योजना बनाई जाएगी। डॉक्टर उरांव शुक्रवार को नेपाल हाउस में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के कक्ष में आयोजित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक के बाद मीडिया से बात कर रहे थे।

उरांव ने कहा कि इस बैठक में लॉकडाउन की अवधि में दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर एक बार फिर विचार विमर्श किया गया। लॉकडाउन खत्म होने के बाद उनके लौटने की स्थिति में उनके लिए रोजगार हो, इसकी व्यवस्था सरकार द्वारा की जाएगी। उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल से मनरेगा का काम भी शुरू किया जाएगा। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सभी जिलों को पर्याप्त राशि उपलब्ध करा दी गयी है, जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्य शुरू करने को लेकर जो दिशा-निर्देश जारी किया है, उसी की भांति राज्य में भी राजमार्गों का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा, जिसके माध्यम से रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।

उन्होंने बताया कि राज्य और देश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है, कृषि कार्य में मदद के लिए सरकार आगे बढ़ाएंगी, जिन किसानों के पास खेत जोतने के लिए हल-बैल की व्यवस्था नहीं होगी, सरकार उन खेतों को ट्रैक्टर के माध्यम से जोतने की व्यवस्था करेगी, इसलिए किसान अभी से खाद-बीज और अन्य संस्थानों की जुगाड़ में लग जाए। उन्होंने बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में दुधारू मवेशी है, लॉकडाउन में दूध उत्पादन में लगे किसानों की मुश्किलें बढ़ी है।

सरकार इस अतिरिक्त दूध से खोआ, पाउडर और अन्य घी बनाने में किसानों को सहयोग करेगी। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद वापस लौटने वाले लाखों लोगों के रहने एवं खाने-पीने तथा जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की विस्तृत योजना बनाई जाएगी। इधर, सभी प्रवासी श्रमिकों को डीबीटी के माध्यम से एक-एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिलनी शुरू हो चुकी है।

उपसमिति के सदस्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में केन्द्र सरकार से विशेष सहायता की मांग की गयी है। राज्य सरकार अपने स्तर से कोरोना-19 के हर चुनौती का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। मास्क, सेनिटाईजर, डॉक्टर के लिए पीपीटी किट, नर्सों के लिए किट, टेस्टिंग मशीन सहित जरूरत की हर चीजें व्यापक पैमाने पर उपलबध करायी जा रही है।

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