आरबीएसके की एक और सफलता, आबिद को मिली खुशियों की सौगात दिल में छेद का हुआ निःशुल्क उपचार

आरबीएसके की एक और सफलता, आबिद को मिली खुशियों की सौगात    दिल में छेद का हुआ निःशुल्क उपचार


वाराणसी, 09 अक्टूबर 2020

कोविड-19 काल में सरकार कोरोना के साथ ही साथ अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रत्येक स्तर पर प्रयास कर रही है । इसी क्रम में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत शुक्रवार को अलीगढ़ के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में जनपद के चोलापुर ब्लॉक के धौरहरा मनियार पट्टी निवासी लाल मोहम्मद के नौ माह के बच्चे का जन्मजात दोष दिल में छेद का सफलतापूर्वक निःशुल्क उपचार किया गया । इलाज के बाद बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ है और बच्चे के माता-पिता बहुत प्रसन्न है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ वीबी सिंह ने दी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने चोलापुर आरबीएसके टीम को इस सराहनीय कार्य के लिए प्रोत्साहित किया है लगातार इसी तरह के कार्य की अपेक्षा की।

चोलापुर ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ आरबी यादव ने बताया कि आरबीएसके टीम के डॉ अमित, डॉ प्रतिभा, पूनम पाल एवं संजय भारती के द्वारा दिनांक 30 सितंबर 2020 को गंभीर जन्मजात दोष दिल में छेद से ग्रसित एक नौ माह के बच्चे आबिद को विजिट के दौरान चिन्हित किया गया। बच्चे के दिल में छेद होने की वजह से वह सामान्य बच्चों की तरह खेल कूद में असमर्थ था । वहीं माता-पिता अति कमजोर वर्ग के होने की वजह से बच्चे के इलाज कराने में असमर्थ थे । बच्चे के पिता लाल मोहम्मद ने इससे पहले एक दो बार निजी चिकित्सालय में इलाज के लिए संपर्क किया लेकिन बहुत अधिक रुपये लगने की वजह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी । डॉ यादव ने बताया कि आरबीएसके टीम द्वारा चिन्हित किए जाने के बाद जिले के अधिकारियों द्वारा त्वरित तत्परता दिखाते हुये अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज जो कि राज्य सरकार द्वारा इस बीमारी के उपचार के लिए अनुबंधित है, में संपर्क कर बच्चे को वहाँ के लिए संदर्भित किया गया । कोविड-19 प्रोटोकॉल को ध्यान रखते हुये बच्चे और उसके माता-पिता की कोरोना जांच हुयी और जांच में निगेटिव आने के बाद वह दिनांक 7 अक्टूबर 2020 को अलीगढ़ पहुंचे और तत्पश्चात बच्चे को भर्ती कराया गया । स्थिति की गंभीरता को देखते हुये मेडिकल कॉलेज द्वारा तुरंत बच्चे की इको जांच कराई गई और अन्य जांच के पूरा होने के बाद दिनांक 9 अक्टूबर 2020 को सफलतापूर्वक हृदय की सर्जरी की गई । इलाज के बाद बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ है और उसके माता-पिता हर्षोल्लाषित हैं ।

बच्चे के पिता लाल मोहम्मद ने कहा कि बच्चे के पूरे इलाज में उनका एक भी रुपया नहीं लगा और उसका अच्छे से इलाज किया गया । उन्होने बताया कि इलाज के दौरान उन्होने अपना खून भी दिया । वह स्वास्थ्य विभाग की इस योजना से बहुत खुश हैं और उन्होने स्वास्थ्य विभाग को धन्यवाद अर्पित किया है।

आरबीएसके के नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ एके गुप्ता ने बताया कि देश में जन्मे बच्चों में जन्मजात दोषों का प्रतिशत लगभग 7% है जिसमें से लगभग 1 प्रतिशत बच्चे दिल में छेद के जन्मजात दोष के साथ जन्मते हैं। दिल में छेद होने से प्रायः बच्चों में सबसे सामान्य लक्षण हाथ, पैर, जीभ का नीला पड़ जाना, ठीक तरह से सांस न ले पाना और माँ का दूध ठीक तरह से नहीं पी पाना एवं खेल-कूद में जल्दी थक जाना है । डॉ गुप्ता ने बताया कि बच्चों को जन्मजात दोषों से बचाने के लिए गर्भावस्था के प्रारम्भ से तीन माह तक फोलिक एसिड एवं चौथे माह की शुरुआत से प्रतिदिन आयरन एवं फोलिक एसिड की एक-एक लाल गोली खिलाई जानी चाहिए । यदि गर्भवती में खून की कमी (एनीमिया) है तो उसको प्रतिदिन आयरन की दो लाल गोली खानी चाहिए।

डीईआईसी मैनेजर डॉ अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत नौ अलग-अलग जन्मजात दोषों का चिन्हीकरण करके जन्म से लेकर 19 वर्ष तक के बच्चों के उपचार के लिए सरकार द्वारा गंभीरता से प्रयास किया जा रहा है। जन्मजात दोषों में कंजेनाईटल हार्ट डिसीज (सीएचडी) हृदय की एक गंभीर जन्मजात दोष है जिसे सामान्य भाषा में दिल का छेद कहा जाता है। सामान्यतः इसके उपचार में 4 से 5 लाख रुपये का खर्च लगता है, जो कि आरबीएसके योजना के अंतर्गत निःशुल्क किया जाता है। आरबीएसके के अंतर्गत जनपद में ग्रामीण क्षेत्रों में 16 टीमें कार्यरत हैं जो प्रत्येक गाँव में विजिट कर जन्मजात दोषों की पहचान करती हैं एवं उनके उपचार के लिए प्रयास करती है।

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