कोरोना और ब्रेस्ट कैंसर: तकलीफ़ भी, उम्मीद भी भारत में ब्रेस्ट कैंसर।

कोरोना और ब्रेस्ट कैंसर: तकलीफ़ भी, उम्मीद भी भारत में ब्रेस्ट कैंसर।


दिल्ली के तिलक नगर इलाक़े में गुरुनानकपुरा एक पुरानी कॉलोनी है जिसके भीतर पहुँचने के लिए आपको कई संकरी गलियों को पैदल पार करना होता हैं।

बिजली के तारों के झुंड से ढकी हुई एक तंग गली के तीन मंज़िला मकान की छत पर खड़ी एक महिला हमारा इंतज़ार कर रही थीं।

34 साल की राधा रानी ने इसी साल अगस्त महीने से दूसरी मंज़िल पर एक छोटा घर किराए पर ले रखा है जहाँ उनके दो बच्चे भी साथ रह रहे हैं।

उन्होंने बताया, "लॉकडाउन ख़त्म होने के दो महीने बाद ही मुझे ब्रेस्ट कैंसर होने का पता चला। हम जम्मू में थे जहाँ डॉक्टर ने दिल्ली आकर पहले सर्जरी और फिर इलाज कराने की सलाह दी।"

राधा रानी के पति नौकरी करते हैं और इन दिनों श्रीनगर में तैनात हैं। दिल्ली में किराए का मकान लेकर इलाज कराने के अलावा कोई चारा नहीं था। लेकिन मुश्किलें और भी थीं।

उन्होंने कहा, "रिश्तेदारों ने कहा दिल्ली में ट्रीटमेंट नहीं लेना है, कोरोना फैला हुआ है। लेकिन हमको ट्रीटमेंट लेना था हम आ गए। सर्जरी के बाद मेरी कीमोथेरेपी शुरू होनी थी लेकिन उसके पहले कोविड टेस्ट में मेरा पॉज़िटिव आ गया. इसके चलते हमारी थेरेपी एक महीना आगे बढ़ानी पड़ी।

कोरोना वायरस और ब्रेस्ट कैंसर

इस साल के जनवरी महीने में भारत में कोरोना वायरस ने दस्तक दी थी जिसके चलते 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी।

एक तरफ़ जहाँ अस्पतालों और स्वास्थ्य कर्मियों का लगभग पूरा ध्यान इस वैश्विक महामारी की रोकथाम में लगा वहीं दूसरी तरफ़ नागरिकों को संक्रमण से बचे रहने की हिदायतें दी गईं।

इस प्रक्रिया में दूसरी जानलेवा बीमारियों का इलाज करा रहे लोगों पर ख़ासा असर पड़ा और अनुमान है कि कैंसर, ख़ासतौर से ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े क़रीब 40% ऑपरेशन टल गए।

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ साल 2018 के दौरान भारत में ब्रेस्ट कैंसर से क़रीब 87,000 मौतें हुईं थीं। जबकि महिलाओं को होने वाले कैंसर में से 28% मामले ब्रेस्ट कैंसर के ही थे। बढ़ते आँकड़ों के बीच कोरोना आ पहुँचा।

ऋषि जयसवाल।

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