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ज्यादा सोचना शरीर के लिए होता है घातक चिकित्सकों ने बताई वैश्विक महामारी से लड़ने की नीति...

ज्यादा सोचना शरीर के लिए होता है घातक चिकित्सकों ने बताई वैश्विक महामारी से लड़ने की नीति...



वैश्विक महामारी कोरोनावायरस का दूसरा कहर भारत पर जमकर बरस रहा है इस दौरान भारत में बीते सोमवार को 4 लाख केस पार कर लिए। आपको बता दें कि चिकित्सकों के अनुसार वायरस का नया रूप हमारे फेफड़ों के साथ दिमाग पर भी जोरदार असर डाल रहा है। वायरस के कारण हर तरफ बनी अवस्था को देखते हुए लोग पैनिक होने के साथ-साथ बीमारी के बारे में इतना सोच ले रहे हैं कि उनको हार्ड अटैक जैसी संभावना बन जा रही है। एक्सपर्ट्स ने बताया है कि बीमारी के लक्षण होने के बावजूद खुद में एक पॉजिटिविटी बनाए रखना है ताकि लोग पॉजिटिव सोच कर जल्दी स्वस्थ हो जाएं क्योंकि डर के आगे ही जीत है।

इस महामारी के दौरान मनोचिकित्सक बताते हैं कि लोग देश की हालत को देखकर बीमारी के बारे में इतना ज्यादा सोच लेते हैं कि इसकी वजह से अनियमितता उनके मन में डर बैठने लगा है। जिसका सीधा असर उनके दिमाग पढ़ पढ़ रहा है, और इसी एक्स आईटी की वजह से लोग बीमार पड़ रहे हैं। जिसके बाद लोगों में सांस फूलने घबराहट और चक्कर आने जैसी बीमारियां लगातार पनप रही है।

मनोचिकित्सक बताते हैं कि ऐसी महामारी की स्थिति में जहां पर हर तरफ डर का माहौल है ऐसे में खुद को बिजी रखने के लिए घर में इनडोर गेम्स खेलें और लगातार बीमारी के बारे में न सोचे क्योंकि इससे हमारा मस्तिष्क बीमारी को हमारे शरीर में पनपने की इजाजत दे देता है। कोशिश करें कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद कम से कम करें और खुद के साथ परिवार को समय दें।

मनोचिकित्सक तथा सभी आयोग के लोग बताते हैं कि ऐसी स्थिति में योग और ध्यान काफी मददगार साबित होते हैं जहां पर लोगों को आशावादी सोच के लिए बढ़ावा मिलता है। इसी के साथ सुबह और शाम योग करने से शरीर मजबूत रहता है तथा ऐसी महामारी के दौरान चिकित्सकों ने लोगों से कुछ देर मनपसंद गीत सुनने की भी सलाह दी है। ऐसे में खुद को पॉजिटिव चीजों की तरफ बढ़ावा देने की कोशिश करें क्योंकि वैश्विक महामारी में किसी को संक्रमित होने का डर है और जो लोग पहले से ही संक्रमित हैं उनमें मौत का डर लगातार बढ़ता जा रहा है, ऐसे माहौल में नेगेटिव बातों से दूर रहने की कोशिश करें।

नेहा शाह

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