स्वच्छ जल,स्वच्छ वातावरण जीवन जीने के लिए ज़रूरी है

स्वच्छ जल,स्वच्छ वातावरण जीवन जीने के लिए ज़रूरी है

राघवेंद्र सिंह : संवाददाता , बचपन एक्सप्रेस

स्वच्छ जल,स्वच्छ वातावरण जीवन जीने के लिए ज़रूरी है। उसी प्रकार स्वच्छ हवा स्वास्थ के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। 20 साल पहले और अब में तुलना करे तो वायु का स्तर कम होता दिखाई देता है। बीते कुछ वर्षों इसकी गुणवत्ता में कमी आई है।

यह दिखाने के लिए सबूतों का एक बहुत मजबूत निकाय है। कैसे वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं को पहले की तुलना में कम सांद्रता पर प्रभावित करता है। फिर भी इसे बदला नहीं जा सकता।

लोग आज भी वायु प्रदूषण चलते हर साल लाखों लोग अपनी जानें गवा देते हैं। लोगों के स्वस्थ वर्षो के नुकसान के अनुसर यह आंकड़े देखने को मिलते हैं।

वायु प्रदूषण को रोकने के भारत सरकार ने कई बड़े कदम भी उठाए हैं। जिससे दुनिया भर में चल रही ग्लोबल वार्मिंग में अपना योगदान दें सके।

वायु के दूषित होने के कारण बीमारी का बोझ अब अन्य प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य जोखिमों जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक आहार और तम्बाकू धूम्रपान के बराबर होने का अनुमान लगाया गया है।

2015 में, विश्व स्वास्थ्य सभा ने वायु शुद्धता और स्वास्थ्य पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिसमें वायु प्रदूषण को इस्केमिक हृदय रोग,स्ट्रोक,अस्थमा और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों के लिए एक जोखिम कारक के रूप में मान्यता दी गई थी। चुनौती की वैश्विक प्रकृति एक बढ़ी हुई विश्व भर में प्रतिक्रिया की मांग करती है।

दूषित हवा से शरीर का लगभग हर अंग प्रभावित हो सकता है। छोटे छोटे आकार होने के कारण , वायु प्रदूषक फेफड़ों के माध्यम से रक्तप्रवाह में प्रवेश करने में सक्षम होते हैं। जोकि शरीर में आसानी से फैल जाते हैं। जिससे प्रणालीगत सूजन और कार्सिनोजेनेसिटी होती है।

स्वच्छ हवा के संपर्क में न आने से कौन सी बीमारियाँ जुड़ी होती हैं?

वायु की सही गुणवत्ता नहीं होने के नाते सर्व-कारण मृत्यु दर के साथ-साथ विशिष्ट रोगों के लिए एक खतरा है। कुछ खास रोग के परिणाम वायु प्रदूषण के संपर्क से सबसे अधिक दृढ़ता से जुड़े हुए हैं। जिनमें स्ट्रोक, इस्केमिक हृदय रोग, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, फेफड़े का कैंसर, निमोनिया और मोतियाबिंद (केवल घरेलू वायु प्रदूषण) शामिल हैं।

दूषित वातावरण में कितने समय मौजूद रहने से स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।

काम समय और ज्यादा समय दोनो तरह के जोखिम हो सकता है बच्चों और बुजुर्गो के हिसाब से। वायु प्रदूषकों के साथ-साथ संबंधित रोग परिणामों से भिन्न होता है। कुछ प्रदूषकों के लिए नीचे कोई सीमा नहीं होती है। जिससे प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न नहीं होते हैं।

अधिक समय तक संपर्क में आने से फेफड़े की कार्यक्षमता कम हो सकती है। श्वसन संक्रमण हो सकता है और अल्पकालिक जोखिम से अस्थमा जैसे रोग भी हो सकता है। जब यक्ति लम्बे समय तक छोटे छोटे और महीन कणों के संपर्क में रहने लगता हैं। तो साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। जैसे स्ट्रोक, हृदय रोग, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और कैंसर सहित कुछ गैर-संचारी रोग।

महत्वपूर्ण बात यह है कि वायु प्रदूषण के नाते होने वाली मृत्यु और विकलांगता के अनुसार इससे जुड़े सभी स्वास्थ्य नतीजों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुमान रूढ़िवादी होने की संभावना है। केवल स्वास्थ्य परिणाम जिनके लिए महामारी विज्ञान के साक्ष्य में मजबूत निश्चितता शामिल है (यानी स्ट्रोक, इस्केमिक हृदय रोग, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, निमोनिया और फेफड़ों का कैंसर) शामिल हैं।

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