बच्चो के खराब मस्तिष्क का कारण है मोटापा

बच्चो के खराब मस्तिष्क का कारण है मोटापा


बचपन का मोटापा एक बढ़ती हुई चिंता है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के अनुसार, हर पांच बच्चों में से लगभग एक मोटापे से ग्रस्त है।आजकल बच्चों को पौष्टिक खाना अच्छा ही नहीं लगता है, उन्हें तो जंक फूड खाने में मजा आता है। बच्चों को जंक फूड आसानी से मिल जाता है। बच्चों के इस खानपान के चलते मोटापा तेजी से उनकी तरफ बढ़ रहा है।

बच्चों में तनाव की समस्या को देखा जा रहा है। इसके अलावा बच्चों में आत्मविश्वास की कमी हो रही है। इन समस्याओं के कारण बच्चा अवसाद में चला जाता है और खुद को बोझिल समझता है। इसके बाद मोटापा बढ़ने की शुरुआत हो जाती है।

यदि परिवार में माता-पिता मोटे हैं तो उनको बच्चे भी मोटे होते हैं। इसके अलावा माता-पिता दोनों में से कोई एक मोटा है तब भी बच्चे में मोटापा बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

बचपन में मोटापे का शिकार होने पर बच्चों का कद बढ़ना रुक जाता है। बच्चों के शरीर में कई अंगो का सही से विकास नहीं हो पाता है।

कई बच्चे शारीरिक व्यायाम नहीं कर पाते क्योंकि वे स्थिर गतिविधियों में अपना समय बिताते हैं जैसे कंप्यूटर का उपयोग करना, वीडियो गेम खेलना या टीवी देखना. टीवी और इसी प्रकार की अन्य तकनीकें बच्चों में शारीरिक व्यायाम की कमी का एक बड़ा कारण हैं।

बचपन में मोटापे की रोकथाम:


फल और सब्जी का सेवन बढ़ाएं।

टेलीविजन कम देखना। टेलीविजन देखते समय भोजन करना अतिरिक्त भोजन के सेवन का एक प्रमुख कारण है। टेलीविज़न विज्ञापन बच्चों को फास्ट फूड की ओर ले जाते हैं।

चीनी का सेवन कम करें। चीनी को अब नया 'तंबाकू' कहा जाता है और इसे हर उम्र में सीमित किया जाना चाहिए। मीठे पेय के बजाय पानी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिये।

शारीरिक गतिविधि को प्रोत्साहित करें। सीमित समय और शैक्षिक दबावों के कारण बच्चों में सक्रिय जीवन सुनिश्चित करना संघर्ष पूर्ण कार्य है। माता-पिता को छोटे बच्चों में शारीरिक गतिविधि और बड़े बच्चों में 60 मिनट का रोजाना प्रभावी शारीरिक गतिविधि की सुविधा को सुनिश्चित करना चाहिए।


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