50% कर्मचारियों को रोस्टर पर बुलाए जाने के मुख्य सचिव के आदेश का अनुपालन नहीं हो रहा है।

50% कर्मचारियों को रोस्टर पर बुलाए जाने के मुख्य सचिव के आदेश का अनुपालन नहीं हो रहा है।


राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने इस संदर्भ में मुख्य सचिव को कई बार पत्र लिखा है। 50% रोस्टर के अनुपालन के लिए मुख्य सचिव पहले भी निर्देश जारी कर चुकें है लेकिन कार्यालयों में सभी कर्मचारियों को लगातार बुलाया जा रहा है ।

यह भी विचारणीय है कि यदि समूह "क" एवं "ख" के सभी अधिकारी कार्य पर आएंगे तो उनसे संबंधित विभागों के कर्मचारियों की उपस्थिति आवश्यक ही होगी। कार्यालयों में हेल्प डेस्क भी सक्रिय नहीं है। थर्मल स्कैनिंग एवं सैनिटाइजेशन की भी व्यवस्थाएं आधी अधूरी हैं।

प्रदेश के ज्यादातर कार्यालयों में इतना स्पसे नहीं है कि 2 कर्मचारियों के बीच में 2 गज की दूरी बनाकर सोशल डिस्टेंसिंग बनाई जा सके, यही कारण है कि जवाहर भवन, नगर निगम, उत्तर प्रदेश सचिवालय, लोक भवन, परिवहन निगम, उच्च शिक्षा, लखनऊ विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य भवन जैसे तमाम कार्यालयों में आए दिन कर्मचारी कोविड-19 से संक्रमित पाए जा रहे हैं।

संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने मुख्य सचिव को पिछले सप्ताह भी पत्र लिखकर यह मांग किया था कि कार्यालयों में थर्मल सैनिटाइजेशन एवं हेल्पडेस्क की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कि जाए।

सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए 50% रोस्टर अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के आदेश सीधे मुख्य सचिव स्तर से ही दिए जाएं इसमें विभागीय अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव को समीक्षा करने के बाद यह आदेश लागू करने की शर्त न रखी जाये।

मौजूदा आदेश में रोस्टर का आकलन विभागीय अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव को करने को कहा गया है। इसी कारण 50% रोस्टर लागू करने में विभाग अध्यक्षों के लिए निर्देश स्पष्ट नहीं हो पा रहे हैं ।विशेषकर लखनऊ, कानपुर में बढ़ते हुए कोविड-19 के मामलों को देखते हुए 50% रोस्टर सख्ती से लागू किया जाना चाहिए ताकि सोशल डिस्टेंसिंग कार्यालयों में मेंटेन हो सके। अब कोविड-19 के एसिंप्टोमेटिक केसेस बहुत ज्यादा सामने आ रहे हैं, जिसमें खांसी, जुकाम, बुखार के लक्षण ना होने पर भी कोरोना के संक्रमण पाए जा रहे हैं। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को वर्क टू होम की सुविधा देना चाहिए ताकि covid-19 के संक्रमण की चेन टूट सके। कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहा है एवं कोरोना को भगाने में लगा हुआ है लेकिन सरकार कर्मचारियों की समस्याओं की पर, उनके साथ ड्यूटी पर आने वाली दिक्कतों के प्रति गंभीर नहीं हो रही है। यह अत्यंत ही चिंता का विषय है। इन्हीं समस्याओं पर विचार करने के पश्चात ही राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 21 सितंबर से प्रदेश भर में जागरूकता आंदोलन चलाए चलाने का निर्णय लिया है।

यह भी अत्यंत ही आश्चर्य का विषय है कि अनलॉक 4 लागू हो गया है ।प्रदेश में सारी व्यवस्थाएं लगभग समान हो गई है, मुख्य सचिव स्तर पर एवं मुख्यमंत्री जी के स्तर पर लगातार विभागीय बैठकों का आयोजन हो रहा है लेकिन कर्मचारी संगठनों के साथ संवादहीनता बनी हुई है। कर्मचारियों की समस्याओं पर सरकार बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

जे एन तिवारी ने स्पष्ट किया है कि यदि संवाद हीनता ऐसे ही बनी रही तो जल्दी ही प्रदेश में कर्मचारियों का एक बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा।

जेल एन तिवारी

अध्यक्ष

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद

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