आईईटी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम–2026 का शुभारंभ
इंजीनियरिंग के नए सफर का शुभारंभ, विद्यार्थियों ने सीखे नवाचार, अनुशासन और कौशल विकास के मंत्रझांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ...

इंजीनियरिंग के नए सफर का शुभारंभ, विद्यार्थियों ने सीखे नवाचार, अनुशासन और कौशल विकास के मंत्रझांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ...
इंजीनियरिंग के नए सफर का शुभारंभ, विद्यार्थियों ने सीखे नवाचार, अनुशासन और कौशल विकास के मंत्र
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) में नवप्रवेशित बीटेक विद्यार्थियों के लिए आयोजित स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम–2026 का गांधी ऑडिटोरियम में शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बीएचईएल झांसी के महाप्रबंधक एन. एन. रमन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग शिक्षा, विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, तकनीकी कौशल, नवाचार, अनुशासन, व्यक्तित्व विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व से परिचित कराना है।
कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे वर्तमान समय में उपलब्ध तकनीक और शोध का अधिकतम लाभ उठाते हुए समय प्रबंधन और जीवन के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें। उन्होंने कहा कि पहले सूचना, संसाधन और अवसर सीमित थे, लेकिन आज तकनीक ने संभावनाओं के द्वार पूरी तरह खोल दिए हैं। अब एक क्लिक में नौकरी की रिक्तियों की जानकारी मिल सकती है, दूसरी क्लिक में रिज्यूमे अपलोड किया जा सकता है और अगली क्लिक में आवेदन भी किया जा सकता है। ऐसे समय में विद्यार्थियों को अवसरों की कमी नहीं, बल्कि सही दिशा, अनुशासन और निरंतर सीखने की जरूरत है।
उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को नैक ए प्लस प्लस, एनआईआरएफ रैंकिंग, पीएम-उषा, यूजीसी कैटेगरी-वन और मेरु जैसी उपलब्धियों से परिचित कराया। प्रो. पाण्डेय ने कहा कि नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए यह गर्व की बात है कि वे ऐसे विश्वविद्यालय का हिस्सा बने हैं, जो उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय और वैश्विक मानदंडों की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक इंजीनियरिंग ज्ञान तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उन्हें एआई-इनेबल्ड, एआई-ड्रिवेन और जनरेटिव एआई के व्यावहारिक उपयोग से भी जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है।
मुख्य अतिथि एन. एन. रमन ने विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग को करियर के रूप में चुनने के लिए बधाई देते हुए कहा कि उन्हें अपने भीतर नई सोच और नया दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को अपने आसपास के परिवेश से सीखना चाहिए, क्योंकि वास्तविक चुनौतियों के समाधान नवाचारपूर्ण और व्यावहारिक सोच से निकलते हैं। उन्होंने युवाओं से जोखिम लेने से न डरने और प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए निरंतर स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने सरकारी और निजी क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों के विभिन्न पक्षों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया और कहा कि सीखने की प्रक्रिया विद्यार्थी जीवन के बाद नौकरी के दौरान भी लगातार चलती रहनी चाहिए।
कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक इंजीनियरिंग प्रो. डी. के. भट्ट के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए संस्थान की शैक्षणिक प्रगति और उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी तथा विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय की सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।
डीन इंजीनियरिंग प्रो. एम. एम. सिंह ने विश्वविद्यालय के इनोवेशन सेंटर और वहां उपलब्ध अत्याधुनिक सुविधाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराया। उन्होंने बताया कि केंद्र में लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये के उपकरण एवं तकनीकी संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियर समाज के भविष्य के निर्माता और महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। विद्यार्थियों को अपनी खूबियों के साथ-साथ अपनी कमजोरियों पर भी निरंतर काम करना चाहिए और मेहनत के साथ मानसिक शांति तथा संतुलन का भी ध्यान रखना चाहिए।
प्रोवोस्ट प्रो. मुन्ना तिवारी ने भारतीय शिक्षा दर्शन में ‘दीक्षारंभ’ की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थी जीवन में आत्मीयता, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को एनएसएस और एनसीसी जैसी गतिविधियों से जुड़ने तथा समाज के प्रति अपने दायित्व को समझने के लिए प्रेरित किया।
इंडक्शन प्रोग्राम के समन्वयक इंजी. राजेश वर्मा एवं एकेडमिक कोऑर्डिनेटर इंजी. शशिकांत वर्मा ने विद्यार्थियों को कार्यक्रम की रूपरेखा और आगामी शैक्षणिक गतिविधियों से अवगत कराया। विशेष सत्र में छात्रावासों की वार्डन डॉ. दीप्ति सिंह, डॉ. सुमिरन श्रीवास्तव और डॉ. ब्रजेश लोधी ने विद्यार्थियों के छात्रावास से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया।
कार्यक्रम के दौरान बीटेक फूड इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों द्वारा तैयार स्वस्थ खाद्य उत्पादों की विशेष फूड बास्केट अतिथियों को भेंट की गई। सांस्कृतिक प्रस्तुति में विद्यार्थियों दिव्यांशी जायसवाल, सूरज और दीपक मिश्रा ने गीत प्रस्तुत किए। डॉ. प्रियंका पाण्डेय ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के आयोजन में विजय वर्मा और डॉ. शुभांगी निगम की प्रमुख भूमिका रही, जबकि मंच संचालन इंजी. अंजली श्रीवास्तव, डॉ. अंजिता श्रीवास्तव और डॉ. साक्षी दुबे ने किया।
कार्यक्रम में आईईटी के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। इनमें इंजी. लाखन सिंह, इंजी. महेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. इकरूप कौर वर्मा, डॉ. रवि कुमार, डॉ. जितेंद्र वर्मा, डॉ राघवेन्द्र दीक्षित, अतीत विजय, डॉ. अतुल मकरारिया, डॉ. सूरजीत रैकवार, इंजी. दिनेश द्विवेदी, इंजी. बिक्रम बहादुर निरंजन, डॉ. राहुल शुक्ला, इंजी. आशीष स्वर्णकार, इंजी. रजत कुशवाहा, गौरव वर्मा, इंजी. अनुराग कुमार, डॉ. सैयद ताजेन अली, डॉ. आलोक गुप्ता, डॉ. आकांक्षा गुप्ता और डॉ. सतेंद्र उपाध्याय सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी शामिल रहे।





