यूरोप में जनता का गुस्सा, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तेज
यूरोप के कई देशों में महंगाई, बढ़ते किराए, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। फ्रांस से...

यूरोप के कई देशों में महंगाई, बढ़ते किराए, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। फ्रांस से...
यूरोप के कई देशों में महंगाई, बढ़ते किराए, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। फ्रांस से लेकर इटली, स्पेन, ग्रीस और बेल्जियम तक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। कहीं छात्र स्कूलों और विश्वविद्यालयों की बदहाल स्थिति के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, तो कहीं लोग महंगे आवास और बढ़ती जीवन-यापन लागत से परेशान हैं। फ्रांस में कई जगह प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं, जिससे सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ा है।
फ्रांस में स्कूलों की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी और बढ़ती महंगाई को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन व्यापक आंदोलन में बदल गए हैं। 17 अक्टूबर को देशभर में हुए प्रदर्शनों में पांच लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की खबर है। कई शहरों में आगजनी, लूटपाट और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा के सिलसिले में दो हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
हिंसा के दौरान फ्रांस के लिमोज शहर के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी गई, जिससे इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। पेरिस समेत कई शहरों में दुकानों और सार्वजनिक इमारतों को भी निशाना बनाया गया। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने घटनाओं की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया। मैक्रों ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लूटपाट करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और प्रभावित शहरों में जरूरत के मुताबिक स्थानीय स्तर पर प्रतिबंध लगाने की संभावनाओं पर भी विचार किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी फ्रांस की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए आव्रजन नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
फ्रांस के अलावा इटली में भी शिक्षा पर सरकारी खर्च, स्कूलों की स्थिति और पढ़ाई की बढ़ती लागत को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। मिलान और ट्यूरिन समेत कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं।
स्पेन में महंगे मकानों और बढ़ते किराए के खिलाफ आंदोलन तेज हुआ है। वहीं, ग्रीस की राजधानी एथेंस में छात्रों ने संसद के सामने टेंट लगाकर छात्रावासों की कमी, महंगे किराए और शिक्षा के बढ़ते खर्च के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। बेल्जियम में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं, जबकि अल्बानिया में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर असंतोष सामने आया है।
यूरोप के अलग-अलग देशों में हो रहे इन प्रदर्शनों के कारण और मांगें एक जैसी नहीं हैं, लेकिन महंगाई, आवास की बढ़ती लागत, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष कई जगह दिखाई दे रहा है। अब चुनौती सरकारों के सामने है कि वे लोगों की मांगों पर किस तरह कार्रवाई करती हैं और हिंसा की घटनाओं पर नियंत्रण रखते हुए शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा कैसे करती हैं।





