विश्वास से बड़ा कोई धर्म,गुरु या भगवान नही: कांतिलाल मांडोत

Update: 2021-11-22 06:08 GMT

सत्य ही ईश्वर का दूसरा रूप है।सत्य के प्रकाश से असत्यवादी जब बौखला जाते है तो यही सत्यवादी की सबसे बडी सफलता है।सत्य को साक्षी की आवश्यकता नही।विश्वास से बड़ा कोई धर्म गुरु या भगवान नही।सच्ची श्रद्धा,विश्वास का अभाव होगा तो हम अपने लक्ष्य तक नही पहुंच सकते है।हमारे में धर्म के प्रति श्रद्धा बढ़ेगी तब ही हमारी लौकिक मंशा पूरी होगी।जब हमारी इच्छा पूरी नही होती है तब हमारा विश्वास डगमगाता रहता है।नियमित स्वाध्याय भी हमारी धार्मिक प्रवृत्ति का आवश्यक अंग है।हम सुबह उठकर समस्याओं से झूझने का काम करते है।शाम तक सफलता की जगह असफलता ही प्राप्त होती है।हम उस लक्ष्य से भटक चुके है।हमारी मंजिल दुःख, संताप और असंतोष पर जाकर रुकती है।पश्चिमी अंधानुकरण की चकाचौंध में हमारी संस्कृति को भुला दिया गया है।हमारे पास नही संत समागम का समय है और नहीं मन्दिर ,गुरुद्वारे जाने का समय है।हम पाप की गठरी हरदिन बांध रहे है।उसके फलस्वरूप हमारा जीवन संकटग्रस्त बन गया है।आज जीवन मे हर कदम पर असफलता है।परिवार में आपसी स्नेह नही है।एक दूसरे पर जानलेवा हमला करते है।


यह सब अपनी दिनचर्या का आधार बन गया है।आज धर्म को गौण समझा जाता है।हम श्रद्धा से भगवान की आराधना करें।किसी को दिया हुआ विश्वास बनाये रखने के लिए ईमानदारी नही बताए तो उसको धार्मिक तो क्या व्यक्ति कहलाने का भी अधिकार नही है।सत्य की कोई सीमा नही है।सत्य अपने आप मे कोहिनूर हीरा है।जब तक अपने आप पर विश्वास नही है तो तो वह दूसरों पर विश्वास नही कर सकता है।विश्वास के अभाव में जीने वाला आकांक्षी के समान सत्य को छू भी नही सकता है।वह हमेशा पाप ही कमाता है।सत्य की चीरकाल विजय होती है।वर्तमान में पूर्ण सत्य का दावा करने वाला नादान है।मनुष्य विश्वास को बनाये रखने के लिए सर्वस्व न्यौछावर करके भी उसकी

रक्षा करता है।वो ही महामानव धरती पर साक्षात भगवान के रूप में विधमान है।पशुजगत में भी विश्वास निभाने के लिए आज भी कटिबद्ध नजर आते है।हेरानी तो इस बात है कि पशुजगत तो मानव पर विश्वास कर रहा है।परंतु दुर्भाग्य यह है कि सर्वोत्तम श्रेष्ठ कहलाने वाला निरीह और निर्दोष प्राणी के साथ भी धोखा करने में भी हिचकिचाता नही है।जहाँ कोई स्वार्थ नही वहा भगवान का वास होता है।भगवान ने भी अहिंसा से बढ़कर सत्य को महामंडित किया है।सत्य के समान कोई तप नही,आराधना नही।सत्य की भूमि पर ही धर्म की खेती की जा सकती है ।आज पग पग पर

हिंसा,लूट,बलात्कर,अपहरण, और हत्या की वारदात हो रही है।यह जुठ,फरेब और धोखाधड़ी की ही वजह है।असत्य को आचरण में लाया जा रहा है।जिससे कुदरत का प्रकोप झेलने के लिए जनता मजबूर है।हम हर क्षेत्र में सत्य को अपनाना चाहिए।असत्य और किसी को धोखे में रखकर लिया गया धन अपनी मूल पूंजी भी साथ मे ले जाता है।इसलिए सत्य को धारण करे।

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