अंबेडकर विश्वविद्यालय के पास से शहीद नगर की ओर जाने वाली सड़क बरसों से इस बात की आस में है कि कोई उसे इंसाफ़ देगा ा

कई बार नगर निगम हो या लखनऊ विकास प्राधिकरण, जिनकी भी  निगाहें इस सड़क पर पड़ी तो  उसे लगा कि उसका रुप सुधर जाएगा पर निराशा ही हाथ लगी |

अंबेडकर विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले बहुत से छात्र छात्राएँ इस मार्ग का उपयोग करते हैं | एकल मार्ग होने के कारण दोनों तरफ़ से वाहन आते जाते हैं और हमेशा जाम और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है ा




 


लखनऊ में G -20 सम्मेलन होने वाला है और शहीद पथ से होकर सारे डेलीगेट आएंगे जाएंगे तो उनकी नज़र इस सड़क पर ज़रूरत पड़ेगी और हो सकता है इस सड़क का इस्तेमाल भी किया जाए अगर ऐसा होता है तो विदेशी और देसी दोनों लोगों को कष्ट का सामना करना पड़ेगा ा

सड़क की एक साइड को बना दिया गया है और दूसरी साइड की सड़क को न बनाना स्थानीय नागरिकों की समझ से बाहर है । क्यों सरकार 5 सौ मीटर के एक रोड के हिस्से को नहीं बना रही है इसकी जानकारी भी सार्वजनिक रूप से नहीं दी गई है।


अगर इस सड़क को बना दिया जाए तो ये लिंक रोड का काम करेगी और इस इलाक़े के नागरिकों के साथ साथ पी.जीआई की तरफ़ जाने के लिए ये काफ़ी अच्छा विकल्प रोड के रूप में काम आ सकता है ।

स्थानीय नागरिकों की यही माँग है कि G -20   सम्मेलन स्टार्ट होने से पहले इस सड़क को भी इंसाफ़ मिले और इसका कायाकल्प हो सके।