नई दिल्ली : पंजाब सरकार का खेती अनुबंध में किसानों को सलाखों के पीछे भेजने का और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना देने का प्रावधान है
जबकि केंद्र सरकार के कृषि क़ानून में किसान कभी भी किसी अनुबंध से बाहर निकल सकता है ये कहना है केंद्र के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का |
पिछले दो महीने से मई लगातार किसानो से कह रहा हु की अगर इस कानून में कोई कमी हो तो आप बताएं पर कोई भी इसके किसी तरह की कमी नहीं निकाल पा रहा है |
सदन में भी मैंने बताया है की एक करों रूपये कृषि क्षेत्र में ढांचा गत सुविधा के लिए दिया गया है और केंद्र ने ये सुनिश्चित किया है की आत्मनिर्भर भारत के तहत ये सारी रकम और सुविधा उन तक पहुंच जाए |
भारत सरकार की गरीब किसान को लेकर बनायीं गयी योजना से उनके जीवन स्तर में काफी बदलाव आया है | इन कृषि कानूनों से किसान अपनी फसल को कहीं भी बेच सकता है और उसको मज़बूरी में ही अपना उत्पाद किसी को नहीं बेचना होगा |
प्रधान मंत्री मोदी ने भी अपने मन की बात कार्यक्रम में कई बार ऐसे किसानो की बात की है जिन्होंने कृषि के नए तरीको को अपनाकर अपना ही नहीं अगल बगल के किसानो का जीवन बदल दिया | बुंदेलखंड की वकील गुरवीन चावला का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया की किस तरह इस युवा वकील ने बुंदेलखंड में स्ट्राबेरी की खेती कर के वहां के किसानो को न सिर्फ परम्परागत खेती के अलावा अलग से कमाने का जरिया प्रदान किया |
किसान पिछले कई महीनो से यूपी , हरियाणा और पंजाब बॉर्डर पर इन कृषि कानूनों को ख़त्म करने के लिए आंदोलन कर रहे है |