विश्व विरासत दिवस के अवसर पर महाबोधि मंदिर में किया गया पूजा अर्चना

Update: 2026-04-19 06:56 GMT




भगवान बुद्ध की ज्ञान स्थली महाबोधि मंदिर में महाबोधि मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के द्वारा विश्व विरासत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर महाबोधि मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के सचिव डॉ श्वेता महारथी और बौद्ध भिक्षुओं ने मंदिर के गर्भ गृह में पूजा अर्चना की। महाबोधि मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के सचिव डॉ श्वेता महारथी ने महाबोधि मंदिर के इतिहास, इसकी प्रासंगिकता, ऐतिहासिकता, यूनेस्को द्वारा महाबोधि मंदिर को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किए जाने स संबंधित विस्तृत जानकारी दी।

बीटीएमसी के सचिव डॉ श्वेता महारथी ने बताया कि महाबोधि मंदिर, बोधगया मानवता की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक शाश्वत प्रतीक बनकर खड़ा है।

2002 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्रदान की है। महाबोधि मंदिर उस पवित्र स्थान को चिह्नित करता है जहाँ 2,600 साल से भी पहले गौतम बुद्ध ने पूजनीय बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था। यह पावन स्थल आज भी दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रेरित करता है, जो राष्ट्र, संस्कृति और आस्था की सीमाओं से परे है।

उन्होंने बताया कि वास्तुकला की दृष्टि से भव्य यह मंदिर, अपने ऊँचे पिरामिडनुमा शिखर और बारीक नक्काशीदार अग्रभाग के साथ, प्रारंभिक भारतीय ईंट वास्तुकला के विकास को दर्शाता है।

आध्यात्मिक रूप से, यह भक्ति, ध्यान और तीर्थयात्रा का एक जीवंत केंद्र बना हुआ है, जो शांति, ज्ञान और आत्म- साक्षात्कार की खोज में साधकों को आकर्षित करता है।

उन्होंने कहा कि विश्व विरासत दिन के अवसर पर महाबोधि मंदिर हमें अपनी वैश्विक धरोहर को संरक्षित और सुरक्षित रखने की साझा जिम्मेदारी की याद दिलाता है। यह केवल अतीत का स्मारक नहीं, बल्कि वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए करुणा, सद्भाव और जागृति का एक जीवंत प्रकाशस्तंभ है।

यह विश्व धरोहर दिवस मानवता के ऐसे अमूल्य खजानों की रक्षा के लिए नई प्रतिबद्धता को प्रेरित करे।

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