प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में आयोजित भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन में भाग लिया। क्राउन प्रिंस हाकॉन और नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गहर स्टोर भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते-टीईपीए के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में हुई वृद्धि की सराहना की। श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों को व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के अंतर्गत 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश लक्ष्य को प्राप्त करने और भारत में दस लाख रोजगार सृजित करने के लिए प्रयास करने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने भारत की मजबूत विकास गति, जनसांख्यिकीय लाभांश, प्रतिभाशाली युवाओं, सुदृढ़ व्यापार प्रथाओं, निवेशक-अनुकूल नियामक ढांचे और प्रतिस्पर्धी संघवाद की भावना को रेखांकित किया। श्री मोदी ने भारत में समुद्री अर्थव्यवस्था, जहाज निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज और स्टार्टअप जैसे प्रमुख क्षेत्रों में नॉर्वे के अधिक निवेश को प्रोत्साहित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के हरित परिवर्तन पर बल देते हुए देश के विकास, बढ़ती ऊर्जा मांग, जलवायु प्रतिबद्धताओं और नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड अवसंरचना, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा निवेश, समुद्री डीकार्बोनाइजेशन, महासागर स्थिरता और जलवायु वित्त में नॉर्वे के वैश्विक नेतृत्व की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों से नई साझेदारियां बनाने, सहयोग के उभरते क्षेत्रों की पहचान करने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने का आग्रह किया।
शिखर सम्मेलन में 50 से अधिक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और भारत तथा नॉर्वे के व्यापार और अनुसंधान समुदायों के 250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने के बाद द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में आई तेजी को शिखर सम्मेलन में चिह्नित किया है। शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय और नॉर्वे की कंपनियों और संस्थाओं के बीच कई व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि उच्च स्तरीय व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन से पहले, ओस्लो में विभिन्न स्थानों पर चार गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए गए थे। इन सत्रों में स्वास्थ्य सेवा में नवाचार, समुद्री सहयोग, बैटरी और ऊर्जा भंडारण प्रणाली, डिजिटलीकरण और विद्युतीकरण, और पवन ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया गया।