हिमाचल के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी: आजादी की लड़ाई में पहाड़ों का योगदान
भारत की स्वतंत्रता केवल नेताओं के संघर्ष का परिणाम नहीं थी, बल्कि लाखों गुमनाम वीरों के त्याग, साहस और बलिदान की अमर गाथा है। ऐसे ही एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे स्वर्गीय श्री जंगी राम, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।
स्व. श्री जंगी राम का जन्म वर्ष 1908 में ग्राम एवं डाकघर चांसू, तहसील सांगला, जिला किन्नौर (हिमाचल प्रदेश) में हुआ। देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज (INA) में एक सिपाही के रूप में शामिल हुए। उस समय देश को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने के लिए हजारों युवाओं ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और जंगी राम भी उन्हीं वीरों में से एक थे।
आजाद हिन्द फौज में सेवा के दौरान उन्हें अंग्रेजी शासन द्वारा छह माह का कारावास भी भुगतना पड़ा। जेल की कठिन परिस्थितियों और यातनाओं के बावजूद उनका देशप्रेम कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता को सर्वोपरि मानते हुए हर कठिनाई का साहसपूर्वक सामना किया। बाद में उन्हें सेना की सेवा से निष्कासित कर दिया गया, लेकिन उनका संघर्ष और बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में सदैव अमिट रहेगा। 14 जुलाई 1972 को उनका स्वर्गवास हो गया, किंतु उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।