अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप पर हाईकोर्ट के फैसले से मुसलमान नाराज़, जाने क्या है पूरा मामला.....

Update: 2021-05-30 06:10 GMT



केरल हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुस्लिम और लैटिन धर्मांतरित ईसाइयों के आरक्षण वाले आदेश को रद्द कर दिया है. इस आदेश के मुताबिक मुस्लिम और लैटिन धर्मांतरित ईसाइयों को 80:20 के अनुपात में छात्रवृत्ति देने की घोषणा की गई गई थी. जस्टिस शाजी पी चाली और चीफ जस्टिस मणिकुमार की पीठ ने आदेश को रद्द करते हुए कहा कि, यह आदेश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है.

दरअसल, केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 'योग्यता सह साधन' छात्रवृत्ति के लिए अल्पसंख्यकों का उप-वर्गीकरण करते हुए कहा गया था कि इसके लाभ के मामले में 80 प्रतिशत आरक्षण मुसलमानों और 20 प्रतिशत आरक्षण लैटिन कैथोलिक ईसाइयों और धर्मांतरित ईसाइयों के लिए होगा.

अदालत ने कहा कि कानूनी रूप से ये बंटवारा सही नहीं है. हाईकोर्ट ने यह आदेश जस्टिन पल्लीवतुक्कल नाम के व्यक्ति की जनहित याचिका पर दिया है. बता दें कि ये पूरा मामला अल्पसंख्यक समुदायों के लिए छात्रवृत्ति योजना से जुड़ा है. केरल में 11 सदस्यीय एक कमेटी को जस्टिस राजिंदर सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने का काम सौंपा गया था. कमेटी के फैसले के बाद इस स्कीम के तहत राज्य सरकार ने 5000 मुस्लिम छात्राओं को छात्रवृत्तियां दी. इसके बाद साल 2011 में इस स्कीम के तहत लैटिन कैथोलिक ईसाइयों और धर्मांतरित ईसाइयों के छात्रों को भी लाया गया.

लेकिन 2015 में सरकार ने इस फैसले को बदल दिया. नए आदेश में कहा गया कि मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के बीच आरक्षण 80:20 के अनुपात में होगा. यानी मुसलमानों के लिए 80%, लैटिन कैथोलिक ईसाइयों और अन्य समुदायों के लिए सिर्फ 20 फीसदी. बाद में इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई.

अराधना मौर्या

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