यौन शोषण केस में गोवा की सत्र अदालत ने 26 मई को तरुण तेजपाल को किया बरी कहा- पीड़िता के खिलाफ ही सारे सबूत.....

Update: 2021-05-26 12:07 GMT



तरुण तेजपाल केस में 26 मई को गोवा की सत्र अदालत ने 2013 के बलात्कार मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल को बरी करते हुए पीड़ित महिला के आचरण पर सवाल उठाए और कहा कि उन्होंने ऐसा कोई असामान्य बर्ताव नहीं किया जिससे लगे कि वह यौन शोषण की पीड़िता हैं। बता दें कि सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी 21 मई को 500 पेज के अपने फैसले में कहा कि अभियोजन और बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों से पीड़ित की सच्चाई पर संदेह होता है और प्रमाणित सबूत के अभाव में आरोपी को संदेह का लाभ मिल रहा है। आपको बता दें कि तहलका के पूर्व मुख्य संपादक तेजपाल को अदालत ने 21 मई को बरी कर दिया था।

तरुण तेजपाल पूर्व मुख्य संपादक पर फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में अपने सहकर्मी का यौन शोषण करने का आरोप लगाया गया था ये घटना तक की बताई जा रही है जब एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गोवा गए थे। इस पर न्यायाधीश क्षमा जोशी ने कहा कि यहां ध्यान देने वाली बात है कि पीड़ित ने कोई ऐसा असामान्य बर्ताव नहीं किया जिससे लगे कि वह यौन शोषण से पीड़ित है। जिसके बाद अदालत ने उसके द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी दावों को खारिज कर दिया कि पीड़ित सदमे में थी और कथित घटना के बाद भी आरोपी को भेजे गए संदेशों पर गौर कर रही थी।

अदालत ने आदेश देते हुए कहा कि इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि बलात्कार का पीड़िता पर काफी असर पड़ता है और उसे शर्मिंदगी महसूस होती है लेकिन साथ ही बलात्कार का झूठा आरोप आरोपी पर भी उतना ही असर डालता है, उसे शर्मिंदा करता है और उसे बर्बाद कर देता है। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ित द्वारा आरोपी को होटल में रहकर अपनी लोकेशन भेजना असामान्य सी बात है। अदालत ने कहा कि अगर आरोपी ने हाल फिलहाल में पीड़िता का यौन शोषण किया है और वह उससे डरी है तथा उसकी हालत ठीक नहीं है तो उसने आरोपी से बात क्यों की और उसे अपनी लोकेशन क्यों भेजी। जिसमें न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि पीड़िता किसी प्रकार से डरी हुई नहीं थी।

इतना ही नहीं आपको बता दें कि अदालत ने बयान जारी करते हुए कहा कि ऐसा कोई चिकित्सीय सबूत नहीं है जो प्राथमिकी दर्ज करने में देरी और पीड़िता द्वारा चिकित्सा जांच के लिए इंकार करने पर यौन शोषण को साबित कर दें। पीड़िता महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध और लैंगिक मुद्दों से संबंधित मामलों पर रिपोर्ट करती थीं और इसलिए वह बलात्कार तथा यौन उत्पीड़न पर ताजा कानूनों से अवगत थीं। अदालत के द्वारा दिए गए आदेशों में कहा गया कि विशेषज्ञों की मदद से घटनाओं में छेड़छाड़ करने या घटनाओं को जोड़ने की संभावना हो सकती है। आरोपी के वकील ने यह सही दलील दी कि पीड़िता की गवाही की इस पहलू से भी जांच की जानी चाहिए। तरुण तेजपाल के द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी साध्य प्रमाणों को देखते हुए अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है।

नेहा शाह

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