दिल्ली एनसीआर में बढ़ा वायु प्रदूषण का खतरा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बुलाई 4 जून को 18 सदस्य मीटिंग.....
वैश्विक महामारी कोरोनावायरस की तीसरी लहर को लेकर के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने सख्ती का रुख अपनाया है। आयोग का मानना है कि तीसरी लहर के दौरान वायु प्रदूषण नियंत्रण में नहीं रहा तो मानव स्वास्थ्य पर अभी से दोहरी मार पड़ेगी। वायु प्रदूषण नियंत्रण पर पाने के लिए आयोग ने 4 जून को एक विशेष बैठक का आयोजन किया है।
बता दें कि बैठक का आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया गया है और एजेंडा कोरोना काल एवं सर्दी के दौरान एनसीआर सहित समीपवर्ती क्षेत्रों में हवा साफ रखने की रणनीति तैयार करना होगा। पुनर्गठन के बाद यह आयोग की पहली बैठक है। इसमें सभी 18 सदस्य शामिल होंगे परंतु पुनर्गठन के बाद 18 सदस्य आयोग को 21 कर दिया गया है, पर 3 सदस्यों को अभी चुना जाना बाकी है।
गौरतलब है कि सितंबर से ही दिल्ली एनसीआर के मौसम और वायु की गुणवत्ता खराब होने लगती है। जो पूरी राजधानी के लिए खतरा साबित हो सकती है। सितंबर के बाद अक्टूबर के महीने में पराली जलाने की घटनाओं के कारण वायु प्रदूषण का खतरा ज्यादा बढ़ने लगता है और वायु की गुणवत्ता खराब होने के कारण महामारी दुगनी तेजी से फैलने का डर भी बढ़ता जा रहा है। वायु प्रदूषण नियंत्रण आयोग का मानना है कि कोरोना का संक्रमण सीधे फेफड़ों पर असर डालता है। ऊपर से प्रदूषित वायु से लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।
सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि इस बैठक में उपायों और योजनाओं, जिन पर बीते कई सालों से पराली प्रबंधन को लेकर काम चल रहा है, की समीक्षा होगी। साथ ही वायु प्रदूषण न बढ़े, इस पर भी चर्चा होगी। हालांकि पुनर्गठन के बाद केंद्र सरकार ने वह प्रविधान हटा दिया है, जिसमें पराली जलाने के दोषी पर भारी जुर्माना और जेल भेजने तक का नियम था। इसलिए इस समस्या के समाधान के लिए कोई वैकल्पिक उपाय अपनाया जाएगा।
नेहा शाह