शिक्षा से रोजगार तक : आजमगढ़ में अंतरराष्ट्रीय मंथन गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति के सशक्तिकरण पर केंद्रित रही संगोष्ठी
आजमगढ़।महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय परिसर उस समय अंतरराष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बन गया, जब ब्रह्मर्षि स्वामी सहजानन्द सरस्वती सेवा ट्रस्ट न्यास के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी-सह कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति पर केंद्रित ध्यान तथा पूर्ण रोजगारयुक्त भारत के निर्माण में शैक्षिक संस्थानों की भूमिका” रहा, जिसने शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण के बीच गहरे संबंधों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिडबी के मैनेजर अक्षय कुमार ने कहा कि समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए शिक्षा, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग का आपसी समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजनकर्ता बनाने की आवश्यकता है, जिसके लिए उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देना होगा।
प्रशांत राय ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि इस शक्ति को समयानुकूल प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा और नैतिक मार्गदर्शन मिले, तो भारत रोजगार संकट से निकलकर अवसरों की अर्थव्यवस्था बन सकता है।वहीं अवनीश राय ‘मानस’ ने नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए कहा कि महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आर्थिक भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को शिक्षा और कौशल से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम में नार्वे से मोहन कोल्हे ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता करते हुए अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली में रोजगारोन्मुख नवाचार की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई जा सकती है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज, किसान, युवा और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी शैक्षिक संस्थानों का मूल उद्देश्य होना चाहिए।कार्यक्रम का संचालन शुभम राय ने कुशलतापूर्वक किया। संगोष्ठी में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में छात्रों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।