महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के छात्र स्टार्टअप्स ने दिखाया उद्यमिता का दम, कुलपति बोले— “युवा नवप्रवर्तक ही विकसित भारत के वास्तविक निर्माता”

Update: 2026-06-09 15:00 GMT

 आजमगढ़। दिनांक : 09 जून 2026, महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के श्यामा प्रसाद मुखर्जी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन फाउंडेशन में मंगलवार को नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी रचनात्मकता का प्रेरणादायी संगम देखने को मिला। विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र स्टार्टअप्स ने कुलपति प्रो. संजीव कुमार के समक्ष अपने अभिनव उत्पादों, सेवाओं और व्यावसायिक मॉडलों का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया। कार्यक्रम में फाउंडेशन के निदेशक डॉ. नरेन्द्र सिसोदिया तथा परामर्शदाता संस्था राफ्ट्स एंड रिवर्स के प्रतिनिधि श्री नृपेन भट्ट विशेष रूप से उपस्थित रहे।

प्रस्तुतीकरण के दौरान यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ कि विश्वविद्यालय के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी भी उद्यमिता की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहे हैं तथा समाज की वास्तविक चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीक आधारित नवाचार विकसित कर रहे हैं। विद्यार्थियों के विचारों, उनकी व्यावसायिक समझ तथा समस्याओं के समाधान के प्रति उनके दृष्टिकोण की उपस्थित विशेषज्ञों ने मुक्त कंठ से सराहना की।

कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रमुख स्टार्टअप्स में “जीरो क्यू (ZeroQ)” विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस स्टार्टअप ने अस्पतालों एवं चिकित्सकों के लिए विकसित अपने स्मार्ट अपॉइंटमेंट मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म का प्रदर्शन किया। यह प्रणाली मरीजों को पूर्व निर्धारित समय पर चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने में सहायता करती है, जिससे लंबी कतारों एवं प्रतीक्षा समय की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसी प्रकार “आचार्य अतुल” नामक स्टार्टअप ने अपनी व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श आधारित डिजिटल सेवा का प्रदर्शन किया। आधुनिक तकनीक एवं डेटा विश्लेषण पर आधारित यह मंच उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्रदान करता है तथा ज्योतिष से संबंधित विभिन्न डिजिटल टूल्स भी उपलब्ध कराता है।

“वी डू (WeDo)” स्टार्टअप ने एक अभिनव शैक्षिक मंच प्रस्तुत किया, जो विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों से जोड़ते हुए ऑनलाइन ट्यूशन सेवाओं का अवसर प्रदान करता है। यह मंच एक ओर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करता है तो दूसरी ओर युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आय अर्जित करने का अवसर भी उपलब्ध कराता है।

कार्यक्रम में एक अन्य महत्वाकांक्षी स्टार्टअप द्वारा देशव्यापी एडवोकेट एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म विकसित करने की योजना प्रस्तुत की गई। इस मंच पर तहसील स्तर से लेकर उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय तक के अधिवक्ताओं की विस्तृत प्रोफाइल उपलब्ध होगी, जिससे देश का कोई भी नागरिक अपनी कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप अधिवक्ताओं की सेवाएँ ऑनलाइन प्राप्त कर सकेगा। यह पहल न्यायिक सेवाओं को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इनके अतिरिक्त भी अनेक छात्र स्टार्टअप्स ने कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाओं एवं सामाजिक नवाचार से जुड़े अपने अभिनव विचारों और व्यावसायिक मॉडलों का प्रस्तुतीकरण किया। विशेषज्ञों ने उन्हें अपने उत्पादों को और अधिक व्यवहारिक एवं बाजारोन्मुख बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रदान किए।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने युवा उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्रीधारी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें नवाचार, शोध, कौशल और उद्यमिता से जोड़कर रोजगार सृजक बनाना है। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय इसी लक्ष्य को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रहा है। आज जिन विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए हैं, वे केवल स्टार्टअप नहीं बना रहे हैं, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने का कार्य कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि “विश्वविद्यालयों की भूमिका अब पारंपरिक शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रह गई है। आज आवश्यकता ऐसे नवाचार केंद्रों की है जो युवाओं की कल्पनाशक्ति को उद्योग, समाज और बाजार से जोड़ सकें। मुझे गर्व है कि हमारे विद्यार्थी अपनी शिक्षा के शुरुआती वर्षों में ही उद्यमिता की दिशा में सार्थक पहल कर रहे हैं। यह संकेत है कि भविष्य में यही युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनेंगे।”

कुलपति ने आगे कहा कि “प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में स्टार्टअप संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण में विश्वविद्यालयों को अग्रणी भूमिका निभानी होगी। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर छिपी रचनात्मक क्षमता को मंच मिले, उसे आवश्यक मार्गदर्शन, संसाधन और प्रोत्साहन प्राप्त हो तथा वह अपने विचार को सफल उद्यम में परिवर्तित कर सके। श्यामा प्रसाद मुखर्जी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन फाउंडेशन इसी दिशा में एक सशक्त मंच के रूप में कार्य कर रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि “विश्वविद्यालय प्रशासन नवाचार और स्टार्टअप गतिविधियों को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा। आने वाले समय में उद्योग जगत, निवेशकों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक सहभागिता स्थापित कर विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। हमारा लक्ष्य पूर्वांचल को नवाचार और उद्यमिता के एक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करना है।”

कार्यक्रम के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन फाउंडेशन ने अत्यंत कम समय में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए अनेक संभावनाशील स्टार्टअप्स को विकसित एवं प्रोत्साहित किया है। फाउंडेशन की परामर्शदाता संस्था राफ्ट्स एंड रिवर्स द्वारा प्रदान किए जा रहे विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं संरचित मेंटरशिप के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय में नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति निरंतर सुदृढ़ हो रही है। प्रस्तुतीकरण के दौरान परीक्षा नियंत्रक/कुलसचिव आनंद कुमार मौर्य, सहायक कुलसचिव डॉ. महेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक एवं अधिकारी उपस्थित रहे|

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