प्रकृति का संरक्षण हमारी संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा : पीएम मोदी

Update: 2026-06-05 06:38 GMT





प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए ‘सुभाषितम’ संदेश में प्रकृति संरक्षण को भारतीय संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल हमारा दायित्व नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली, परंपराओं और मूल्यों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

संस्कृत श्लोक के माध्यम से दिया संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश के साथ संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया। श्लोक है, “मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥” इस श्लोक का भावार्थ है कि वायु हमारे लिए आनंददायक और कल्याणकारी रूप से प्रवाहित हो, नदियां जीवनदायिनी एवं पोषणकारी जल प्रदान करें तथा औषधियां और वनस्पतियां समस्त जीव-जगत के लिए आरोग्य और सुख का स्रोत बनें। इस संदेश के जरिए प्रधानमंत्री ने प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता तथा संरक्षण की भावना को रेखांकित किया।

Similar News