पटना एम्स के विशेषज्ञों ने बताई लगातार दर्ज होने वाली मौतों की वजह कहा 20% मरीज मानसिक तनाव की वजह से स्वस्थ होने में असमर्थ....

Update: 2021-04-23 13:05 GMT



बिहार में कोरोनावायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है,और स्थिति यह है कि बिहार की राजधानी पटना में दवाई से लेकर ऑक्सीजन तक खत्म होने की कगार पर है। आपको बता दें कि इस दौरान पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान चिकित्सा इकाई में भर्ती होने वाले संक्रमितों की हालत कुछ ऐसी है कि महज 20% ही स्वस्थ होकर घर लौट पा रहे हैं।

आपको बता दें कि यह आंकड़ा 2021 में मिले कोरोनावायरस के नए स्ट्रेन के अध्ययन को लेकर सामने आया है। डॉक्टर ने बताया है कि जो 20% मरीज भी सही होकर घर लौट रहे हैं, उनको भी अन्य परेशानियों की वजह से उपचार करने की जरूरत पड़ रही है।

आपको बता दें कि पटना के एम्स पलमोनरी के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर दीपेंद्र कुमार ने बताया कि जो मरीज आईसीयू में भर्ती हो रहे हैं उन्हें किडनी और लीवर की परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा है। मेडिसीन विभागाध्यक्ष डॉ. रवि ने बताया कि नया स्ट्रेन मल्टी ऑर्गेन डिसआर्डर का कारण बन रहा है। इसके कारण मरीज की मौत हो जा रही है। वही एनेस्थिीसिया विभागाध्यक्ष व एम्‍स के डीन डॉ. उमेश भदानी का कहना है कि आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण तथा बेड की कमी भी होने के कारण लोग स्वस्थ होने से पहले ही मृत्यु कर जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मरीज जब तक भर्ती होता है तब तक समझने लायक नहीं रहता जिसकी वजह से अधिकतर मौतें दर्ज हो रही है।

पटना एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्ष मरीज 6 से 7 दिनों में ऑक्सीजन देने के बाद बेहतर रिस्पांस करते थे। लेकिन इस बार आईसीयू में जो मरीज आ रहे हैं उन्हें दवाएं और प्लाज्मा देने के बाद भी स्वस्थ करने में हम असक्षम साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालत इस कदर खराब है कि 100 फ़ीसदी ऑक्सीजन और दवाई भी बेहतर परिणाम नहीं दे रही है। वहीं डॉ राय ने बताया कि एक और बड़ी परेशानी का सामना मरीज कर रहा है, उन्होंने बताया कि 20 फ़ीसदी मरीज मानसिक रूप से टूटते जा रहे हैं, इस वजह से उनका ब्लडप्रेशर सामान नहीं रह रहा है।

नेहा शाह

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