आधुनिकता के बीच ग्वालियर मेले में जीवित हैं परंपरागत दुकानें

Update: 2026-01-06 05:00 GMT



 लगभग 121 वर्ष पुराने ऐतिहासिक ग्वालियर मेले ने समय के साथ आधुनिक स्वरूप अपना लिया है, लेकिन परंपरागत दुकानें आज भी इसकी पहचान बनी हुई हैं। रेडियो-घड़ियों की जगह इलेक्ट्रॉनिक शोरूम और छोटे झूलों की जगह बिजली से चलने वाले बड़े झूले लग गए हैं, फिर भी घोड़ा-बैल सजावट सामग्री, घुंघरू, घंटी, मंजीरा और लकड़ी के बैंत जैसी दुकानों की मांग बनी हुई है। कई परिवार तीन-चार पीढ़ियों से ये दुकानें लगाते आ रहे हैं। ग्रामीण अंचल के लोग आज भी इन परंपरागत वस्तुओं के लिए मेले का इंतजार करते हैं।

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