55.23 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनेगा चिप प्लांट, नहीं होगी चिप की कमी

भारत और ताइवान के अफसर हफ्तों से चिप बनाने वाले प्लांट की डील करने में लगे हैं। बताया जा रहा है कि भारत में $7.5 बिलियन

Update: 2021-09-29 06:58 GMT

चिप की कमी को दूर करने के लिए भारत और ताइवान के बीच एक समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसके तहत भारत में ही चिप का प्रोडक्शन किया जाएगा। इससे कंपोनेंट पर लगने वाले टैरिफ में भी कटौती होगी।

55.23 हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगा प्लांट

भारत और ताइवान  के अफसर हफ्तों से चिप बनाने वाले प्लांट की डील करने में लगे हैं। बताया जा रहा है कि भारत में $7.5 बिलियन (करीब 55.23 हजार करोड़ रुपए) की लागत का चिप प्लांट बनाया जाएगा, इसमें 5G डिवाइस से लेकर इलेक्ट्रिक कार तक के कंपोनेंट शामिल होंगे।

1.77 लाख करोड़ रुपए के चिप  को भारत इंपोर्ट करता है

हाल ही में भारत में चिप की कमी की वजह से ही जियो फोन के लॉन्च में देरी हुई है। जिसे गूगल के साथ साझेदारी से बनाया जा रहा है। अभी भारत 24 बिलियन डॉलर ( लगभग 1.77 लाख करोड़ रुपए) के सेमीकंडक्टर को इंपोर्ट करता है, जो साल 2025 तक लगभग 100 बिलियन डॉलर (करीब 7.38 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है।

सेमीकंडक्टर चिप क्या हैं?

  • आज हर एक व्यक्ति दिनभर में दसियों गैजेट्स का इस्तेमाल कर रहा है। फिर चाहे वह कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्ट कार, वॉशिंग मशीन, ATM, अस्पतालों की मशीन से लेकर हाथ में मौजूद स्मार्टफोन ही क्यों न हों। यह सेमीकंडक्टर के बिना अधूरे हैं। यह चिप्स या सेमीकंडक्टर छोटे-छोटे दिमाग हैं, जो गैजेट्स को संचालित करते हैं।
  • सेमीकंडक्टर चिप्स सिलिकॉन से बने होते हैं। इलेक्ट्रिसिटी के अच्छे कंडक्टर होते हैं। इन्हें माइक्रोसर्किट्स में फिट किया जाता है, जिसके बिना इलेक्ट्रॉनिक सामान और गैजेट्स चल ही नहीं सकते। सभी एक्टिव कॉम्पोनेंट्स, इंटिग्रेटेड सर्किट्स, माइक्रोचिप्स, ट्रांजिस्टर और इलेक्ट्रॉनिक सेंसर इन्हीं चिप्स से बने होते हैं।


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