सीएसजेएमयू में अंतरराष्ट्रीय कृषि सम्मेलन 2026 का शुभारंभ, सतत कृषि पर वैश्विक मंथन शुरू

Update: 2026-04-17 13:29 GMT


कानपुर । छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कृषि सम्मेलन 2026 का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। 17-18 अप्रैल तक चलने वाले इस सम्मेलन का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की भी सहभागिता है। सम्मेलन में प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वय के माध्यम से सतत कृषि विकास पर विशेष चर्चा की जा रही है।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत आयोजन संयोजक एवं निदेशक डॉ. हिमांशु त्रिवेदी के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने सम्मेलन की थीम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों का संतुलन ही भविष्य की कृषि को टिकाऊ बना सकता है। मुख्य अतिथि के रूप में चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कानपुर नगर के आयुक्त के. विजयेंद्र पांडियन ने सतत कृषि के लिए नीतिगत सहयोग और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। । अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारतीय प्राचीन ज्ञान प्रणाली और आधुनिक कृषि नवाचारों का एकीकरण ही भविष्य की कृषि को नई दिशा देगा।

उन्होंने इस सम्मेलन को ज्ञान-विनिमय का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए इसके दूरगामी प्रभावों की अपेक्षा व्यक्त की। इस अवसर पर इस दौरान सह-संयोजक डॉ. वी.के. त्रिपाठी एवं डॉ. कौशल कुमार की भूमिका भी उल्लेखनीय रही । इसके बाद आयोजन सचिव डॉ. श्रेया सिंह ने सम्मेलन की रूपरेखा, उद्देश्यों एवं तकनीकी सत्रों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान कॉन्फ्रेंस स्मारिका एवं बुक ऑफ एब्स्ट्रैक्ट्स का विमोचन भी किया गया, जो इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण चरण रहा। सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। जर्मनी से आए डॉ. उलरिच बर्क ने अग्निहोत्र एवं होमा फार्मिंग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि की अवधारणा पर प्रकाश डाला। वहीं आईसीएआर-एटारी, कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने कृषि विस्तार तंत्र में नवाचारों की आवश्यकता पर बल दिया। आईसीएआर-आईआईपीआर, कानपुर के निदेशक डॉ. जी.पी. दीक्षित ने दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के समन्वय को कृषि विकास की आधारशिला बताया ।

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में भी विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। डॉ. आर.के. पाठक ने “कॉस्मिक फार्मिंग” की अवधारणा पर चर्चा की, जबकि डॉ. एस.के. चतुर्वेदी ने फसल सुधार एवं उत्पादन वृद्धि की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। डॉ. शिव दत्त ने कृषि अनुसंधान में बौद्धिक संपदा अधिकारों की भूमिका समझाई और डॉ. दीपा एच. द्विवेदी ने नैनोटेक्नोलॉजी को किसानों के लिए उपयोगी बताया। यह दो दिवसीय सम्मेलन तकनीकी सत्रों, शोध पत्र प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देगा तथा वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करेगा।

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