राष्ट्रहित सर्वोपरि, ऊर्जा संरक्षण में विश्वविद्यालय परिवार निभाएगा जिम्मेदारी”- कुलपति प्रो. संजीव कुमार

Update: 2026-05-16 13:59 GMT


आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय ने ऊर्जा संरक्षण एवं राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने प्रधानमंत्री के आह्वान से प्रेरित होकर विश्वविद्यालय परिवार से पेट्रोल एवं डीजल के उपयोग में संयम बरतने की भावनात्मक अपील की है।

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार 18 मई से 23 मई तक विश्वविद्यालय परिसर में पेट्रोल एवं डीजल चालित निजी वाहनों के प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल अथवा अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग करते हुए परिसर में पहुंचेंगे।

कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने एक उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेष रूप से अमेरिका, इजरायल एवं ईरान के बीच जारी संघर्ष का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है। युद्ध की लंबी अवधि के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है, ऐसे में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से विदेशी वस्तुओं के उपयोग में कमी लाने तथा पेट्रोल-डीजल की खपत को सीमित करने का आह्वान किया है।राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि समाज का प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति थोड़ी-थोड़ी ऊर्जा बचत का संकल्प ले, तो देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। इसी भावना के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह अभिनव पहल शुरू की है।

कुलपति के निर्देश पर कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा ने आधिकारिक पत्र जारी करते हुए उक्त अवधि में पेट्रोल एवं डीजल चालित वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा बचत के इस अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।हालांकि परीक्षार्थियों एवं आवश्यक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने बस सेवाओं तथा परिसर में राज्यपाल महोदया द्वारा उपलब्ध कराई गई बस के संचालन को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा है, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।विश्वविद्यालय परिवार द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल माना जा रहा है, बल्कि यह सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्रप्रेम का भी सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।

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