केएमसीएलयू में सात दिवसीय 'लैबटेक-2026' तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न; छात्र-छात्राओं ने सीखीं आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकें”
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय द्वारा 'आईटीएलएस एकेडमी' लखनऊ के औद्योगिक सहयोग से आयोजित सात दिवसीय उच्चस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 'लैबटेक-2026: बायोकेमिकल, माइक्रोबायोलॉजिकल एवं फूड सेफ्टी टेक्निक्स' का आज विश्वविद्यालय परिसर में अत्यंत भव्यता के साथ सफलतापूर्वक समापन हुआ। २३ अक्टूबर से प्रारंभ होकर आज ३१ अक्टूबर २०२६ तक अनवरत चली इस ज्ञानवर्धक कार्यशाला में मेधावी शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं को विभिन्न अत्याधुनिक वैज्ञानिक विधाओं का न केवल व्यावहारिक ज्ञान दिया गया, बल्कि उन्हें गहन प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया।
विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति व मुख्य संरक्षक प्रो. अजय तनेजा एवं विज्ञान संकाय की डीन व संरक्षिका प्रो. तत्हीर फ़ात्मा के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में विज्ञान जगत के कई लब्धप्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने छात्र-छात्राओं को संबोधित कर उनका दिग्दर्शन किया। प्रशिक्षण के दौरान आईटीएलएस एकेडमी के प्रख्यात विषय-विशेषज्ञों द्वारा छात्र-छात्राओं को उन्नत प्रयोगशाला स्तर पर विशेष ज्ञान-समृद्ध मॉड्यूल्स के अंतर्गत प्रशिक्षित किया गया। इसके तहत 'बायोकेमिकल तकनीकों' में बायोमॉलिक्यूल्स का परिचय, कलरिमेट्री व स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री के सिद्धांतों के साथ मोलिश, बेनेडिक्ट, आयोडीन व ब्युरेट टेस्ट सहित एन्थ्रोन और लोअरी विधि द्वारा प्रोटीन व फैट का सटीक निर्धारण करना सिखाया गया।
'माइक्रोबायोलॉजिकल तकनीकों' के अंतर्गत माइक्रोबियल वर्गीकरण, कल्चर मीडिया के निर्माण व स्टरलाइजेशन, सीरियल डाइल्यूशन तथा टोटल प्लेट काउंट, स्प्रेड प्लेट एवं पोर प्लेट विधियों से बैक्टीरिया और E. coli की पहचान करने की सूक्ष्म बारीकियां सिखाई गईं। 'स्टेनिंग तकनीकों' में जीवाणुओं के वर्गीकरण हेतु बैक्टीरियल स्मीयर निर्माण, सिंपल, ग्राम, नेगेटिव, एंडोस्पोर व कैप्सूल स्टेनिंग और माइक्रोस्कोपी के व्यावहारिक कौशल का विकास किया गया। इसके साथ ही, 'मॉलिक्यूलर बायोलॉजी तकनीकों' के अंतर्गत डीएनए/आरएनए की जटिल संरचना, पौधों, बैक्टीरिया व लार से डीएनए का आइसोलेशन, प्यूरीफिकेशन, डीएनए क्वांटिफिकेशन और एगरोज़ जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस जैसी समकालीन तकनीकों का सजीव प्रदर्शन किया गया। जन-स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए 'खाद्य मिलावट परीक्षण' के विशेष मॉड्यूल में छात्र-छात्राओं को दूध में स्टार्च, यूरिया, पानी व फॉर्मेलिन; हल्दी में मेटानिल येलो; चीनी में चाक पाउडर; हरी सब्जियों में मैलाकाइट ग्रीन; शहद में शुगर सॉल्यूशन; सरसों में अर्जीमोन और लाल मिर्च में ईंट के पाउडर जैसे घातक तत्वों की पहचान करने का अत्यंत व्यावहारिक व समाजोपयोगी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए विज्ञान संकाय की डीन एवं गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. तत्हीर फ़ात्मा ने छात्र-छात्राओं को ओजस्वी संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक युग में मात्र किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रयोगात्मक अनुभव और उत्कृष्ट तकनीकी कौशल का होना आज के समय की सबसे अनिवार्य मांग है। उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि इस ७ दिवसीय गहन कार्यशाला में अर्जित किया गया तकनीकी हुनर विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उच्च शिक्षा, वैश्विक उद्योग जगत और शोध के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान दिलाएगा तथा उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करेगा।
कार्यक्रम के भव्य समापन पर आईटीएलएस एकेडमी के निदेशक इंजी. अखिलेश कुशवाहा एवं अंशारा मुजतबा ने विश्वविद्यालय प्रशासन की अकादमिक प्रतिबद्धता और आयोजन मंडल के अथक प्रयासों की सराहना करते हुए सभी अतिथियों व प्रशिक्षणार्थियों के प्रति सहृदय कृतज्ञता ज्ञापित की।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में संयोजक मंडल के डॉ. रत्नेश सिंह और डॉ. शालिनी राय तथा आयोजन सचिवों की पूरी टीम डॉ. नलिनी धस्माना, डॉ. आसिफ जाफरी, डॉ. अजय कुमार यादव, डॉ. शालिनी सिंह, डॉ. फराह दीबा, डॉ. कल्पना देवी, डॉ. डॉ. कीर्तिमा सचान, अंजलि सिंह, डॉ. अष्टभुजा मिश्रा, डॉ. सिंपल कुमारी और डॉ. अनिल कुमार ने अग्रणी भूमिका निभाई। समारोह के अंत में सभी सफल प्रतिभागी विद्यार्थिओं को मुख्य अतिथियों द्वारा उज्जवल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ आधिकारिक प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।