कैंब्रिज में संस्कृत की 2500 हजार साल पुरानी पहेली को भारतीय स्कालर ने सुलझाया

Update: 2022-12-16 12:35 GMT



ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे भारतीय छात्र ने एक पहेली को हल कर लिया है। जो संस्कृत व्याकरण में दुनिया की सबसे अबूझ पहेली थी। जिसे 2500 वर्षों से बड़े से बड़े विद्वान भी नहीं हल कर पा रहे थे।

संस्कृत भाषा व्याकरण के सूत्रधार पाणिनि द्वारा लिखित एक अष्टाध्यायी में मूल शब्दों से नए शब्द बनाने का नियम है. इसे लेकर कई स्कॉलर्स में भी कन्फूजन होती थी उन्हे, इस नियम के इस्तेमाल से नया शब्द बनाने में अक्सर परेशानी होती थी। लेकिन इस पाठ को भारतीय स्कालर 27 वर्षीय ऋषि राजपोपट ने डिकोड कर लिया, जो लगभग ढाई हजार साल पहले लिखा गया था। इस पहेली ने पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व से विद्वानों को परेशान कर रखा था।

ऋषि राजपोपट, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के सेंट जॉन्स कॉलेज में एशियाई और मध्य पूर्वी स्टडीज विभाग से संस्कृत अध्ययन में पीएचडी पूरी की है। उन्होंने कहा की इस पहेली समस्या को हल करने में उन्हें और दो साल लग गए। पहले नौ महीने ग्रामार की इस पहेली पर काम करने पर भी उन्हे कोई निष्कर्ष नहीं मिल रहा था वो लगभग इसे छोड़ने ही वाले थे उन्होंने एक महीने के लिए किताबें बंद कर दीं और बस गर्मियों का आनंद लिया, तैराकी, साइकिल चलाना, खाना बनाना , प्रार्थना और ध्यान। फिर, बे-मन से मैं काम पर वापस लौटा, और, मिनटों के भीतर, जैसे ही मैंने पन्ने पलटे, ये पैटर्न उभरने लगे, और यह सब समझ में आने लगा।

पाणिनि ने एक मेटारूल सिखाया था, जिसे परंपरागत रूप से विद्वानों द्वारा इस अर्थ के रूप में व्याख्यायित किया जाता है कि समान शक्ति के दो नियमों के बीच संघर्ष की स्थिति में, व्याकरण के क्रमिक क्रम में बाद में आने वाला नियम जीत जाता है। हालांकि, यह अक्सर व्याकरण की दृष्टि से गलत परिणाम देता है। मेटारूल की इस पारंपरिक व्याख्या को राजपोपट ने इस तर्क के साथ खारिज कर दिया था कि पाणिनि का मतलब था कि क्रमशः एक शब्द के बाएं और दाएं पक्षों पर लागू होने वाले नियमों के बीच, पाणिनि चाहते थे कि हम दाएं पक्ष पर लागू होने वाले नियम का चयन करें। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि पाणिनि की भाषा मशीन ने लगभग बिना किसी अपवाद के व्याकरणिक रूप से सही शब्दों का निर्माण किया।


(कृष्णा सिंह )

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