महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय में दिव्यांग बच्चों का शैक्षिक भ्रमण, कुलपति ने कहा—“सपनों को पंख देने का स्थान है विश्वविद्यालय”

Update: 2026-02-18 12:53 GMT


आज विश्वविद्यालय परिसर में उस समय विशेष उत्साह और आत्मीयता का वातावरण देखने को मिला जब विभिन्न क्षेत्र पंचायतों के प्राथमिक विद्यालयों से आए दिव्यांग बच्चों ने शैक्षिक भ्रमण के तहत विश्वविद्यालय का अवलोकन किया। रानी की सराय, मुहम्मदपुर, ठेकमा और पल्हनी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालयों के कुल 60 दिव्यांग छात्र-छात्राएं इस भ्रमण में शामिल रहे। प्रत्येक क्षेत्र पंचायत से 15-15 बच्चों का चयन किया गया था। उनके साथ 12 विशेष शिक्षक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरे भ्रमण के दौरान बच्चों का मार्गदर्शन किया।

जिला समन्वयक संतोष कुमार ने बताया कि इस शैक्षिक भ्रमण का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को उच्च शिक्षा के वातावरण से परिचित कराना और उनके भीतर आगे बढ़ने की प्रेरणा जगाना है। उन्होंने कहा कि “हम चाहते हैं कि ये बच्चे भी बड़े सपने देखें और उन्हें साकार करने का साहस जुटाएं। विश्वविद्यालय जैसे संस्थान उनके लिए प्रेरणा के स्रोत बन सकते हैं।”

भ्रमण के दौरान बच्चों ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और प्रशासनिक भवनों का अवलोकन किया। विशाल परिसर, सुव्यवस्थित कक्षाओं और आधुनिक संसाधनों को देखकर बच्चे अत्यंत उत्साहित नजर आए। उनके चेहरों पर जिज्ञासा, आनंद और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।

भ्रमण के दौरान बच्चों ने कुलपति से कई भावनात्मक और प्रेरणादायक प्रश्न पूछे। कुछ प्रमुख सवाल इस प्रकार रहे—“सर, क्या हम भी बड़े होकर इस विश्वविद्यालय में पढ़ सकते हैं?”“दिव्यांग होने के बावजूद क्या हम डॉक्टर, प्रोफेसर या वैज्ञानिक बन सकते हैं?”“विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने के लिए हमें अभी से क्या तैयारी करनी चाहिए?”“क्या हमारे लिए यहां विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं?”“क्या यहां हमारे जैसे बच्चों के लिए अलग से सहायता की व्यवस्था है?”इन सवालों में उनके मन की आकांक्षा, भविष्य के प्रति उत्साह और स्वयं को साबित करने की प्रबल इच्छा स्पष्ट दिखाई दी।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने बच्चों के साथ समय बिताते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा,“दिव्यांगता किसी भी बच्चे की क्षमता को सीमित नहीं कर सकती। यह विश्वविद्यालय आप सभी का है। यहां आने का आपका सपना बिल्कुल साकार हो सकता है, बशर्ते आप निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास बनाए रखें। शिक्षा ही वह शक्ति है जो हर बाधा को अवसर में बदल सकती है।”उन्होंने आगे कहा,“आपके मन में जो भी जिज्ञासाएं हैं, वे आपकी जागरूकता और सीखने की इच्छा का प्रमाण हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भविष्य में दिव्यांग छात्रों को हर संभव सुविधा और सहयोग प्रदान किया जाए। आप सब अपने जीवन में बड़े लक्ष्य तय करें और उन्हें पाने के लिए अभी से तैयारी शुरू करें।”

कुलपति ने बच्चों को नियमित अध्ययन, अनुशासन और आत्मविश्वास को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि समाज को समावेशी बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।भ्रमण के अंत में बच्चों ने विश्वविद्यालय परिसर में समूह चित्र खिंचवाए और अपने अनुभव साझा किए। कई बच्चों ने कहा कि वे भविष्य में यहीं पढ़ने का सपना लेकर लौट रहे हैं। विशेष शिक्षकों ने भी इस पहल को अत्यंत सार्थक बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के मनोबल को नई दिशा देते हैं।यह शैक्षिक भ्रमण न केवल बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव रहा, बल्कि समावेशी शिक्षा की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का भी सशक्त उदाहरण बना।

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