अवधी भाषा और प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ, संरक्षण और संवर्धन पर हुआ मंथन

Update: 2026-03-25 15:04 GMT


लखनऊ, 25 मार्च 2026। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के अवधी शोधपीठ एवं भारतीय भाषा डेटा संकाय के संयुक्त तत्वावधान में “अवधी भाषा और प्रौद्योगिकी: संरक्षण, संवर्धन एवं भविष्य” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दो दिवसीय सत्र का आज भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन अवधी भारती संस्थान, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के सहयोग से किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात आलोचक एवं साहित्यकार आचार्य सूर्य प्रसाद दीक्षित उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में अवधी भाषा की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “अवधी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण आधार है, जिसे आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।”

संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. अजय प्रताप अवस्थी (वरिष्ठ रिसोर्स पर्सन, भारतीय भाषा डेटा संस्थान, मैसूर) ने भाषा और तकनीक के समन्वय पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डॉ. नीरज शुक्ल, डॉ. रामबहादुर मिश्र, डॉ. हिमांशु गंगवार, डॉ. योगेन्द्र कुमार सिंह एवं डॉ. आराधना अवस्थाना सहित अनेक विद्वानों ने सहभागिता की।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने अपने संबोधन में कहा,

“अवधी भाषा हमारे प्रदेश की आत्मा है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रौद्योगिकी का समुचित उपयोग अत्यंत आवश्यक है। यह संगोष्ठी न केवल भाषा के अकादमिक अध्ययन को नई दिशा देगी, बल्कि इसे डिजिटल युग में वैश्विक पहचान दिलाने का भी कार्य करेगी। विश्वविद्यालय इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से भारतीय भाषाओं को सशक्त बनाने का संकल्प लेता रहेगा।”

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन विश्वविद्यालय के अवधी शोधपीठ द्वारा किया गया। संगोष्ठी में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं भाषा विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की और अवधी भाषा के संरक्षण एवं विकास हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

संगोष्ठी का आगामी सत्र 26 मार्च 2026 को भी जारी रहेगा, जिसमें विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा एवं शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।

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