कविता महिला की आवाज़, अधिकार और आत्मनिर्भरता की प्रभावी अभिव्यक्ति है : डॉ. श्वेता अग्रवाल

Update: 2026-04-13 13:59 GMT


लखनऊ, 13 अप्रैल 2026:ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में मिशन शक्ति के अंतर्गत एक उद्देश्यपूर्ण और विचारोत्तेजक काव्यपाठ का आयोजन कुलपति प्रो. अजय तनेजा के निर्देशन में हाइब्रिड हॉल, अबुल कलाम आज़ाद अकादमिक ब्लॉक में किया गया। इस साहित्यिक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकार, उनकी स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता, समानता और सशक्तिकरण के संदेश को कविता और रचनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना था।

इस अवसर पर प्रस्तुत कविताओं और रचनाओं के माध्यम से महिला के अस्तित्व, उसकी पहचान, उसके सपनों और उसके अधिकारों को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया। कार्यक्रम ने साहित्य को सामाजिक जागरूकता के एक सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित किया। हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ. आराधना आस्थाना ने काव्यपाठ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भारतीय साहित्यिक परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि कविता में महिला केवल सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि शक्ति, साहस, प्रतिरोध और आत्मबोध की भी प्रतीक है। भाषा और साहित्य के माध्यम से महिलाओं की गरिमा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता के संदेश को अधिक गहराई और प्रभाव के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान एजुकेशन विभाग की सहायक प्रो. डॉ. श्वेता अग्रवाल ने कहा कि मिशन शक्ति केवल महिलाओं की सुरक्षा का अभियान नहीं बल्कि उनके मानसिक, शैक्षिक, रचनात्मक और नेतृत्व विकास का एक प्रभावी मंच है। उन्होंने कहा कि कविता और साहित्यिक अभिव्यक्ति छात्राओं को अपनी आवाज़ बुलंद करने, अपने अनुभव साझा करने और अपनी पहचान को मजबूत करने का साहस देती है।लीगल स्टडीज़ विभाग के डॉ. अंशुल पांडेय ने कहा कि मिशन शक्ति महिलाओं के कानूनी अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और न्याय तक पहुँच के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक सशक्त अभियान है। कविता सदैव अन्याय, शोषण और सामाजिक असमानता के विरुद्ध एक प्रभावशाली आवाज़ रही है।

उर्दू विभाग के डॉ. ज़फ़रुन नक़ी ने कहा कि उर्दू कविता की परंपरा में महिला के व्यक्तित्व को सदैव विशेष स्थान मिला है। शास्त्रीय और आधुनिक उर्दू कविता में महिला कभी प्रेम का प्रतीक, कभी धैर्य और संघर्ष की मिसाल, तो कभी प्रतिरोध, आत्मसम्मान और जागरूकता की आवाज़ के रूप में सामने आती है। उन्होंने कहा कि फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, परवीन शाकिर, किश्वर नाहीद और फ़हमीदा रियाज़ जैसे कवियों और कवयित्रियों ने महिलाओं की भावनाओं, समस्याओं और अधिकारों को कविता का विषय बनाकर समाज में चेतना पैदा की। इस अवसर पर चंद्रमणि त्रिपाठी, सैयद फ़ज़ल अब्बास नक़वी, उम्मे हफ़्सा, संजना सिंह, सैयद ज़मन, निदा आलम, मोहम्मद अहमद, अब्दुल कादिर और पूजा मधेशिया ने विभिन्न भाषाओं में ऐसी कविताएँ और रचनाएँ प्रस्तुत कीं, जिनमें मिशन शक्ति के उद्देश्यों, महिलाओं के सम्मान, उनके सामाजिक एवं कानूनी अधिकारों तथा आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के संदेश को सुंदर ढंग से व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आराधना आस्थाना ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अब्दुल कादिर ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की उपस्थिति रही।

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