ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर “डॉ. अम्बेडकर के सामाजिक-आर्थिक विचारों की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन अटल सभागार में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं डॉ. अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. मसूद आलम ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि समावेशी विकास और सामाजिक समरसता सुनिश्चित करने के लिए डॉ. अम्बेडकर के विचारों को व्यवहार में उतारना अत्यंत आवश्यक है।
विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव विकास ने अपने संबोधन में बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य डॉ. अम्बेडकर के विचारों को समकालीन सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में समझना तथा उनकी प्रासंगिकता पर गंभीर विचार-विमर्श करना है।
मुख्य वक्ता डॉ. मंजुल त्रिवेदी, बीएसएनवी पीजी कॉलेज, लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर के सिद्धांत आज भी सामाजिक समानता, आर्थिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती असमानताओं के बीच उनके विचार और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।
मुख्य अतिथि प्रो. अनामिका सिंह, अर्थशास्त्र विभाग, डॉ शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय ने अपने उद्बोधन में डॉ. अम्बेडकर के सामाजिक न्याय, शिक्षा, श्रम अधिकार और आर्थिक नीतियों से जुड़े विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा युवाओं को उनके सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं विषय परिचय डॉ. राहुल मिश्रा ने प्रस्तुत किया, जबकि संचालन डॉ. ऊधम सिंह ने किया. धन्यवाद ज्ञापन प्रो. चंदना डे ने दिया. संगोष्टी के इस अवसर पर प्रो. तनवीर, डॉ. मिनहाज़ हुसैन, डॉ. रघुनंदन सिंह, डॉ. आयशा अमन, डॉ. मनीष कुमार, उपकुलसचिव मो. सुहैल, डॉनलिनी मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, अधिकारी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।