भाषा विवि में अभिलेखागार एवं सामुदायिक सहभागिता पर कार्यशाला का आयोजन

Update: 2026-04-15 14:55 GMT


ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के व्यवसाय प्रशासन विभाग द्वारा, माननीय कुलपति प्रो. अजय तनेजा के नेतृत्व में, अवध इनक्यूबेशन फाउंडेशन के सहयोग से “अभिनव तरीकों से अभिलेखागार के उपयोग एवं सामुदायिक सहभागिता” विषय पर एक ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता व स्वागत भाषण वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता एवं कार्यशाला संयोजक प्रो. (डॉ.) सैयद हैदर अली ने किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने अभिलेखागार के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में अभिलेखागार केवल दस्तावेजों के संग्रहण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये शिक्षण, संस्थागत स्मृति के संरक्षण तथा समाज के साथ सार्थक संवाद के सशक्त माध्यम बनते जा रहे हैं।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में फटाफट चार्जर के निदेशक श्री माधवेंद्र, सिल्वर लाइनिंग से श्री जफर अहमद तथा व्यवसाय प्रशासन विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुशीर अहमद की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने इस शैक्षणिक आयोजन को और अधिक समृद्ध बनाया।

कार्यशाला का मुख्य व्याख्यान रार्ह-चाइव (एक डिजिटल अभिलेखागार) के संस्थापक एवं क्यूरेटर तथा बनवारीलाल भालोटिया कॉलेज, आसनसोल, पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पुस्तकालय के लाइब्रेरियन श्री राजर्षि दास द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अभिलेखागार के नवोन्मेषी उपयोग, शिक्षण में उनकी भूमिका, सामुदायिक सहभागिता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रियाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। अपने व्याख्यान में उन्होंने बताया कि अभिलेखागार को जीवंत शिक्षण स्थलों के रूप में विकसित कर शैक्षणिक संस्थानों को समाज एवं सांस्कृतिक विरासत से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सकता है।

कार्यशाला में शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं युवा नवाचारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अभिलेखीय प्रसार, डिजिटल संरक्षण तथा सामुदायिक ज्ञान प्रणालियों की व्यावहारिक समझ प्राप्त की।

कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह कार्यशाला व्यवसाय प्रशासन विभाग की एक सफल पहल रही, जिसका उद्देश्य अंतर्विषयी शिक्षण, विरासत संरक्षण एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना है।

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